चित्तापुर ने सबक सिखाया’, खरगे की संतोष को सीधी चुनौती

आरएसएस के पंजीकरण, वित्तीय पारदर्शिता पर उठाए सवाल

प्रियांक बोले—कानून से ऊपर कोई संगठन नहीं

कलबुर्गी। चित्तापुर में पथ संचलन को लेकर कर्नाटक की राजनीति गरमा गई है। मंत्री प्रियांक खरगे ने भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष को सीधे चुनौती देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पंजीकरण, वित्तीय पारदर्शिता और कानूनी जवाबदेही पर सवाल उठाए।

खरगे ने कहा कि करीब एक सदी पुराने संगठन को भी कानून और नियमों के दायरे में काम करना चाहिए। उन्होंने दोटूक कहा कि कोई भी संगठन कानून से ऊपर नहीं है।

चित्तापुर की घटना से सबक लें

अपने निर्वाचन क्षेत्र चित्तापुर में हुए पथ संचलन का उल्लेख करते हुए खरगे ने कहा कि केवल पुलिस को सूचना देना सार्वजनिक सडक़ों पर कार्यक्रम आयोजित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। सार्वजनिक सुरक्षा, मार्ग और समय से जुड़े नियमों का पालन करना तथा जहां जरूरी हो, आधिकारिक अनुमति लेना भी आवश्यक है। संतोष को जवाब देते हुए उन्होंने चित्तापुर की घटना से सबक लेने की नसीहत दी।

सौ साल बाद भी पंजीकरण क्यों नहीं

खरगे ने आरएसएस की कानूनी स्थिति और वित्तीय गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि संगठन के पंजीकरण तथा आयकर संबंधी अनुपालन को लेकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि जब अन्य संस्थाओं से पारदर्शिता और नियमों के पालन की अपेक्षा की जाती है, तो आरएसएस को भी अपनी जवाबदेही स्पष्ट करनी चाहिए।

अस्तित्व नहीं, जवाबदेही का सवाल

खरगे ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग संगठन का अस्तित्व समाप्त करने की नहीं, बल्कि उसकी जवाबदेही सुनिश्चित करने की है। सोशल मीडिया पर संतोष को दिए जवाब में उन्होंने संविधान, कानून और प्रशासनिक नियमों के पालन पर जोर दिया।

खरगे के इस बयान से कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा के बीच आरएसएस की कार्यप्रणाली और कानूनी जवाबदेही को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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