श्रावण में मशरूम की मांग बढ़ीमशरूम।

किलो 300-350 रुपए तक पहुंचा भाव

आपूर्ति कम होने से ग्राहकों को परेशानी

दावणगेरे। श्रावण मास शुरू होते ही बाजार में मशरूम की मांग अचानक बढ़ गई है। मांसाहार से परहेज करने वाले लोग स्वाद और पोषण के लिए मशरूम की ओर रुख कर रहे हैं। मांग बढऩे के बावजूद बाजार में पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से ग्राहकों को निराश होना पड़ रहा है। सुपरमार्केट, बड़े बाजार, सब्जी दुकानों और बेकरी में पहुंचने वाला मशरूम कुछ ही मिनटों में बिक रहा है।

200 से बढक़र 350 रुपए किलो

सामान्य दिनों में मशरूम करीब 200 रुपए प्रति किलो बिकता है, लेकिन श्रावण में इसकी कीमत बढक़र 300 से 350 रुपए किलो हो गई है। 200 ग्राम का पैकेट, जो पहले करीब 45 रुपए में मिलता था, अब 85 से 90 रुपए में बिक रहा है।

मध्य कर्नाटक में प्राकृतिक मशरूम की उपलब्धता भी पहले की तुलना में कम हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अगस्त से अक्टूबर के दौरान बारिश के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगने वाले मशरूम की तलाश की जाती थी। हालांकि, कृषि में बढ़ते खरपतवारनाशक के इस्तेमाल के कारण अब प्राकृतिक मशरूम कम उगने की बात कही जा रही है।

आय का अच्छा साधन बन सकती है खेती

दावणगेरे जिले में करीब 20 लोग प्रतिदिन लगभग 40 किलो ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। राज्य में भी ऑयस्टर मशरूम की खेती अधिक हो रही है। वहीं, बटन मशरूम की मांग भी बनी हुई है और इसकी आपूर्ति गोवा, तमिलनाडु तथा केरल से की जा रही है।

कत्तलगेरे कृषि एवं अनुसंधान केंद्र के विस्तार प्रभारी डॉ. गंगप्पागौड़ा बिरादार ने बताया कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढऩे से मशरूम की मांग बढ़ रही है। किसानों के लिए इसका स्थानीय बाजार उपलब्ध है। कम लागत में ऑयस्टर मशरूम की खेती कर किसान महीने में 20 से 50 हजार रुपए तक आय अर्जित कर सकते हैं।

दावणगेरे के ग्राहक अरुण ने बताया कि श्रावण शुरू होने के बाद कई दुकानों और मॉल में मशरूम तलाशने के बावजूद उन्हें आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहा है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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