व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर किया हाउस अरेस्ट
समय रहते पहुंचे पीएसआइ ने बचाए 15 लाख रुपए
उडुपी में दो और साइबर ठगी के मामले
उडुपी. जिले के ब्रह्मावर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगों ने 66 वर्षीय महिला से 65 लाख रुपए ठग लिए। हालांकि समय रहते पुलिस के हस्तक्षेप से 15 लाख रुपए की अतिरिक्त ठगी टल गई। इस मामले ने एक बार फिर वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहे साइबर अपराधियों के बढ़ते नेटवर्क को उजागर कर दिया है।
पीडि़ता शीला (66) को 13 जुलाई की सुबह व्हाट्सएप पर स्वयं को मुंबई पुलिस का अधिकारी बताने वाले व्यक्ति का संदेश और वीडियो कॉल आया। पुलिस की वर्दी पहने आरोपी ने खुद को कोलाबा पुलिस थाने का निरीक्षक बताते हुए दावा किया कि उनके केनरा बैंक खाते में 20 करोड़ रुपए जमा हुए हैं और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके खिलाफ वारंट जारी है। आरोपी ने गिरफ्तारी का भय दिखाकर बैंक खातों की जानकारी ली और कथित जांच के नाम पर रकम बताए गए खातों में जमा कराने को कहा।
पांच दिन तक वीडियो कॉल पर रखकर ठगे 65 लाख
13 से 17 जुलाई के बीच आरोपियों ने लगातार व्हाट्सएप कॉल के जरिए महिला को मानसिक दबाव में रखा और उनके दो बैंक खातों से कुल 65 लाख रुपए अपने खातों में स्थानांतरित करा लिए। यह राशि संपत्ति बिक्री और परिवार की जमा पूंजी से संबंधित थी। मामले में उडुपी साइबर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पीएसआइ की सतर्कता से बच गए 15 लाख रुपए
दिल्ली से संदिग्ध लेनदेन की सूचना मिलने पर ब्रह्मावर के पीएसआइ अशोक मलबगी ने महिला से संपर्क करने का प्रयास किया। इस बीच ठगों ने महिला को किसी का फोन न उठाने की चेतावनी दी और उल्टे पीएसआइ को ही फोन कर पूछताछ शुरू कर दी। इससे संदेह होने पर पीएसआइ सीधे महिला के घर पहुंचे। पुलिस को देखते ही ठगों ने वीडियो कॉल बंद कर दी।
पुलिस के पहुंचने तक महिला सोने के आभूषण गिरवी रखकर जुटाए गए 15 लाख रुपए भी ठगों के खाते में भेजने की तैयारी कर चुकी थीं। समय पर हस्तक्षेप से यह राशि बचा ली गई।
एसपी ने जारी की चेतावनी
उडुपी के पुलिस अधीक्षक हरिराम शंकर ने लोगों से अपील की है कि कोई भी पुलिस या सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप या वीडियो कॉल के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही जांच के नाम पर ऑनलाइन धनराशि जमा कराने को कहती है। ऐसे किसी भी कॉल पर घबराने के बजाय तुरंत निकटतम पुलिस थाने या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
कुछ दिनों में तीन बड़े मामले
उडुपी जिले में हाल के दिनों में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में तेजी आई है। 10 जुलाई को एक सेवानिवृत्त बैंक कर्मचारी से मुंबई साइबर क्राइम अधिकारी बनकर 22 लाख रुपए ठगे गए थे। वहीं एक अन्य मामले में उडुपी निवासी वासुदेव प्रभु (76) को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई का भय दिखाकर 9.29 लाख रुपए एक अज्ञात खाते में स्थानांतरित करा लिए गए। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने साइबर अपराध के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को और अधिक गंभीर बना दिया है।
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