चारे का संकट गहराया, मैदानी क्षेत्र में सूखे की आहटअमृत महल बाड़े में चारा उगाने के लिए प्रस्तावित जमीन।

रागी की बुआई सिर्फ 2 प्रतिशत, मक्का 21 प्रतिशत

86,600 किसानों को चारा बीज किट देने की तैयारी

चिक्कमगलूरु। जिले के मैदानी क्षेत्र में कई वर्षों बाद बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। सूखे जैसे हालात के बीच आने वाले दिनों में पशुओं के लिए चारे का संकट गहराने की आशंका है। रागी और मक्का की कम बुआई तथा बारिश के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

रागी की बुआई महज 2 प्रतिशत

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले में रागी की बुआई केवल 2 प्रतिशत, जबकि मक्का की बुआई करीब 21 प्रतिशत हुई है। बारिश की कमी से बोई गई मक्का की फसल भी प्रभावित हुई है और सफेद भंवरी रोग की चपेट में आ गई है। ऐसे में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध होने को लेकर किसानों में चिंता है।

पशुपालन विभाग का कहना है कि फिलहाल जिले में चारे की कमी नहीं है। हालांकि किसान इससे अलग तस्वीर बता रहे हैं। मैदानी क्षेत्र के किसान हासन जिले के चन्नरायपट्टण से चारा मंगाने लगे हैं और मक्का से तैयार साइलेज का सहारा ले रहे हैं।

अभी से चारे की कमी महसूस हो रही है। आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है।

चारा बैंक खोलने की तैयारी

स्थिति बिगडऩे की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी है। कडूर तालुक के 9 और अज्जमपुर तालुक के 2 गांवों में चारा उगाने के लिए भूमि चिन्हित की गई है। पशुपालन विभाग चारा बैंक स्थापित करने की तैयारी के साथ पशुपालकों के घर-घर जाकर चारे की उपलब्धता का सर्वे भी कर रहा है।

अज्जमपुर, बीरूर, बासूर, लिंगदहल्ली और बिलुवाल स्थित अमृत महल नस्ल संवर्धन केंद्रों के अधीन प्रत्येक बाड़ों में 15 से 20 एकड़ में चारा उगाने की योजना है।

86,600 किसानों को चारा बीज किट

विभाग ने जिले के 86,600 किसानों को पांच-पांच किलोग्राम चारा बीज के मिनी किट उपलब्ध कराने के लिए सरकार से मांग की है। सूखा घोषित होने अथवा आपात स्थिति में चारा बैंक स्थापित करने के लिए संभावित स्थान भी चिन्हित किए गए हैं।

जहां बारिश कम, वहीं पशुधन अधिक

कडूर में बारिश की कमी सबसे अधिक है और यहीं जिले में सबसे ज्यादा 78,939 मवेशी हैं। चिक्कमगलूरु के मैदानी क्षेत्र में 49,654, तरिकेरे में 28,229 और अज्जमपुर में भी 28,229 पशु हैं। बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में पशुधन की बड़ी संख्या किसानों के लिए चारे की चुनौती को और बढ़ा रही है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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