छुट्टियों में किताबों से कारोबार तक, छात्र ने बनाई सफलता की मिसालसन्निधि शेट्टी।

कटहल बेचने से शुरू हुआ सफर अब चिप्स उद्योग तक पहुंचा

दोस्तों और महिलाओं को भी दिया रोजगार

कोटा (उडुपी). छुट्टियों में बच्चे जहां आमतौर पर खेलकूद और मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, वहीं उडुपी जिले के शिरियार ग्राम के पडुमुंडु निवासी सन्निधि शेट्टी ने अपनी मेहनत और व्यावसायिक सोच से अलग पहचान बनाई है। पीयूसी की पढ़ाई पूरी कर डिग्री में प्रवेश की तैयारी कर रहे सन्निधि ने कटहल, तरबूज और पोल्ट्री व्यवसाय से शुरुआत कर अब कटहल चिप्स के लघु उद्योग को सफलतापूर्वक खड़ा किया है।

नौवीं कक्षा से ही शुरू किया कारोबार

सन्निधि शेट्टी ने नौवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही अपनी शिक्षा का खर्च स्वयं उठाने का संकल्प लिया था। उन्होंने आसपास के क्षेत्रों से तरबूज और कटहल खरीदकर उनकी बिक्री शुरू की। पीयूसी तक पहुंचते-पहुंचते उनका कारोबार इतना बढ़ गया कि वे हजारों कटहल खरीदकर विभिन्न कटहल मेलों तथा बेंगलूरु और मैसूरु जैसे शहरों तक आपूर्ति करने लगे।

नुकसान को बनाया अवसर

इस वर्ष 250 से अधिक कटहल बिक नहीं पाए, जिससे नुकसान की आशंका पैदा हो गई। लेकिन व्यवसाय बंद करने के बजाय सन्निधि ने अपने मित्र अभिषेक, सुशांत शेट्टी और प्रदीप के साथ मिलकर कटहल के चिप्स तैयार करने का निर्णय लिया।

तीन-चार महिलाओं की सहायता से चिप्स निर्माण शुरू किया गया। परिणामस्वरूप बची हुई सारी उपज उपयोग में आ गई और गुणवत्तापूर्ण चिप्स को बाजार में अच्छी मांग मिलने लगी। घाटे की कगार पर पहुंचा कारोबार अब लाभ की राह पर आगे बढ़ रहा है।

दूसरों को भी दिया सहारा

चिप्स निर्माण में सहयोग करने वाली महिलाओं को दो से तीन महीने तक रोजगार उपलब्ध कराया गया। सन्निधि अपने साथ जुड़े तीन मित्रों की शिक्षा में भी आर्थिक सहायता कर रहे हैं।

उनकी लगन और उद्यमशीलता को देखते हुए ब्रह्मावर सहित विभिन्न कटहल मेलों में उन्हें नि:शुल्क स्टॉल भी उपलब्ध कराए गए।

शिक्षकों और गांव के सहयोग को बताया अहम

सन्निधि ने कोटा विवेक पीयू कॉलेज के प्राचार्य जगदीश नावड, व्याख्याता गणेश शेट्टी और गांव के लोगों के सहयोग को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया।

बड़ा उद्योगपति बनने का सपना

सन्निधि शेट्टी ने कहा कि बीबीए की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक बड़े उद्यमी के रूप में आगे बढऩा चाहता हूं। छात्र जीवन में छोटे-मोटे व्यवसाय या काम करने से व्यापार की समझ, लोगों से जुड़ाव और चुनौतियों का सामना करने का अनुभव मिलता है। यही अनुभव भविष्य के लिए मजबूत नींव तैयार करता है।

प्रेरणा का स्रोत बनी

साधारण परिवार से आने वाले सन्निधि शेट्टी के पिता श्रीकांत शेट्टी होटल में कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता कलावती एक कारखाने में नौकरी करती हैं। सीमित संसाधनों के बीच युवा छात्र की यह पहल आज कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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