तुंबे ग्रुप के 29 वर्ष पूरे
111 देशों के 5 हजार से अधिक विद्यार्थी जीएमयू में अध्ययनरत
मेंगलूरु। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में तुंबे ग्रुप की स्थापना के 29 वर्ष पूरे हो गए हैं। संस्थान का लक्ष्य अगले पांच-छह वर्षों में दुनिया का सबसे बड़ा चिकित्सा शिक्षा नेटवर्क स्थापित करना है। यह जानकारी तुंबे ग्रुप के संस्थापक तुंबे मोहिद्दीन ने दी।
मेंगलूरु के निकट तुंबे गांव स्थित ‘तुंबे हिल्स’ में शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में मोहिद्दीन ने संस्थान की तीन दशक की यात्रा और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, मीडिया और निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय तुंबे ग्रुप आज वैश्विक पहचान बना चुका है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि खाड़ी क्षेत्र में चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थापित करने वाले वे एकमात्र भारतीय हैं।
उन्होंने कहा कि 1998 में शुरू हुआ गल्फ मेडिकल कॉलेज अब गल्फ मेडिकल यूनिवर्सिटी (जीएमयू) के रूप में विकसित हो चुका है और इसे खाड़ी क्षेत्र का नंबर-1 निजी चिकित्सा विश्वविद्यालय माना जाता है। विश्वविद्यालय में सात कॉलेज हैं, जहां 50 से अधिक पाठ्यक्रमों में 111 देशों के 5 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। जीएमयू का 70 अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के साथ सहयोग है। शोध कार्यों के लिए प्रतिवर्ष 1 करोड़ दिरहम खर्च किए जा रहे हैं।
175 देशों के 1.9 करोड़ मरीजों का उपचार
तुंबे ग्रुप का स्वास्थ्य सेवा नेटवर्क भी बड़े निजी शैक्षणिक-चिकित्सा नेटवर्क में विकसित हुआ है। इसके तहत शिक्षण अस्पताल, क्लीनिक, चिकित्सा केंद्र और प्रयोगशालाएं संचालित हैं। अब तक 175 देशों के करीब 1.9 करोड़ मरीजों का उपचार किया जा चुका है। अजमान स्थित तुंबे मेडिसिटी में 350 बिस्तरों का अस्पताल है। यहां दंत चिकित्सा और फिजियोथेरेपी अस्पताल भी संचालित हैं। अजमान में पशु चिकित्सा संस्थान और शारजाह में मनोरोग संस्थान शुरू किए जा रहे हैं।
अपने गांव के लिए योगदान का संकल्प
तुंबे मोहिद्दीन ने कहा कि तुंबे उनका अपना गांव है और वे स्थानीय समुदाय के लिए कुछ अच्छा करने का संकल्प रखते हैं। अगले दो-तीन वर्षों में इसे साकार करने की योजना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यहां मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की योजना नहीं है, बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के आधार पर समुदाय के हित में योगदान दिया जाएगा।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, बेहतर टीम और यूएई के शासकों तथा सरकार से मिले सहयोग को दिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने पिता की कंपनी में 19 वर्षों तक काम किया, जहां उन्हें व्यवसाय की बारीकियां सीखने का अवसर मिला।
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