काफी उत्पादकों को मेस्कॉम की बड़ी राहत, बिजली बिल पर ब्याज माफ

10 एचपी तक के पंपसेट उपभोक्ताओं को 90 दिन में मूल राशि जमा करने का मौका

मेंगलूरु. मेस्कॉम ने काफी उत्पादकों को बड़ी राहत देते हुए 10 एचपी तक के पंपसेटों के बिजली बिल पर लगने वाले ब्याज को माफ करने का निर्णय लिया है। लंबे समय से मुफ्त बिजली की मांग कर रहे काफी उत्पादकों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मेस्कॉम के अनुसार, पंजीकृत काफी उत्पादकों को बकाया मूल राशि जमा करने के लिए 90 दिनों का समय दिया जाएगा। किसान एकमुश्त अथवा किस्तों में भुगतान कर सकेंगे। इसके लिए जल्द ही नोटिस जारी किए जाएंगे।

दरअसल, काफी उत्पादक कई वर्षों से अन्य किसानों की तरह 10 एचपी तक मुफ्त बिजली सुविधा की मांग कर रहे थे। वर्ष 2008 में काफी को व्यावसायिक फसल मानते हुए इसे बिजली सब्सिडी योजना में शामिल नहीं किया गया था।

वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने विधानसभा में काफी उत्पादकों के 10 एचपी तक के पंपसेटों को मुफ्त बिजली देने की घोषणा की थी। हालांकि, इस संबंध में सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ। इसके बाद बड़ी संख्या में काफी उत्पादकों ने बिजली बिल जमा करना बंद कर दिया।

बताया गया है कि केवल मेस्कॉम क्षेत्र में ही लगभग 14 करोड़ रुपए का बिजली बिल बकाया हो गया है। इस बीच कई उत्पादकों ने मूल राशि जमा करने की इच्छा जताते हुए ब्याज माफ करने की मांग रखी थी।

मेस्कॉम प्रशासन का कहना है कि लंबे समय तक बिल बकाया रहने पर नियमानुसार कनेक्शन काटने और वसूली प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है। ऐसे में किसानों को राहत देने के लिए ब्याज माफी का निर्णय लिया गया है। इससे कंपनी को लगभग 4 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है, लेकिन तीन महीनों में करीब 10 करोड़ रुपए की मूल राशि मिलने की उम्मीद जताई गई है।

मेस्कॉम अध्यक्ष के. हरीश कुमार ने बताया कि मेस्कॉम क्षेत्र में करीब 4 हजार काफी उत्पादक हैं, जिनमें से लगभग 990 किसानों ने पंजीकरण कराया है। फिलहाल ब्याज माफी योजना उन्हीं पर लागू होगी। अन्य किसानों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ सेवा सिंधु पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।

मूडिगेरे, चिक्कमगलूरु, कोप्पा, शृंगेरी, एन.आर. पुर और शिवमोग्गा क्षेत्र के काफी उत्पादकों को इस निर्णय का लाभ मिलेगा। वहीं, यदि चामुंडेश्वरी विद्युत आपूर्ति निगम भी इसी प्रकार का फैसला लेता है तो हासन और कोडगु जिलों के काफी उत्पादकों को भी बड़ी राहत मिल सकती है।

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By Bharat Ki Awaz

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