स्वीडन की महिला को भाया सनातन संस्कारचित्रकूट आयुर्वेद चिकित्सालय।

भारत आई विदेशी महिला ने अपनाया ‘गौरी’ नाम

योग-ध्यान और गोसेवा को बनाया जीवन का हिस्सा

उडुपी। भारतीय सनातन परंपरा और हिंदू संस्कृति के जीवन-मूल्य विदेशों के लोगों को भी आकर्षित कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण स्वीडन की नागरिक और वर्तमान में स्पेन में रह रही एक महिला है, जो कुंदापुर के आलूर स्थित चित्रकूट आयुर्वेद चिकित्सालय के संपर्क में आने के बाद भारतीय संस्कृति से प्रभावित हुईं और उन्होंने अपना नाम बदलकर ‘गौरी’ रख लिया।

योग, ध्यान और गोसेवा में रमा जीवन

गौरी ने बताया कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति प्रेम, गोसंरक्षण, योग और ध्यान ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया है। अवकाश मिलने पर वह भारत आती हैं और चित्रकूट आयुर्वेद चिकित्सालय में समय बिताती हैं। यहां के प्राकृतिक एवं हरित वातावरण में योग-ध्यान करने के साथ गोशाला में गायों के बीच समय बिताना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।

उन्होंने बताया कि हिंदू धर्म और सनातन संस्कृति से प्रभावित होकर अपने गुरु स्वामी ईशानंद सरस्वती के मार्गदर्शन और आशीर्वाद से उन्होंने ‘गौरी’ नाम अपनाया है। वर्तमान में वे अद्वैत वेदांत का गंभीर अध्ययन कर रही हैं।

गायों के बीच मिलता है मानसिक सुकून

गौरी के अनुसार चित्रकूट का वातावरण, कर्मचारियों का अपनापन और गांव का प्राकृतिक परिवेश उन्हें बेहद पसंद है। यह उनका यहां तीसरा दौरा है। उन्होंने बताया कि गायों के साथ समय बिताने से उन्हें मानसिक शांति मिलती है और प्रकृति के अनुरूप यहां उचित आयुर्वेदिक देखभाल भी मिल रही है।

कुंदापुर प्रवास के बाद गौरी तमिलनाडु के तिरुवन्नमलाई स्थित प्रसिद्ध रमण महर्षि आश्रम जाने की योजना में हैं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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