सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सर्वेक्षण की तैयारी
हुब्बल्ली. कर्नाटक में पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से आगामी दिनों में किए जाने वाले सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सर्वेक्षण की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं।
सर्वे से पहले की प्रारंभिक कार्रवाई के तहत हेस्कॉम (हुब्बल्ली इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी) क्षेत्र में आने वाले सभी जिलों में घर-घर जाकर बिजली मीटर से जुड़े आरआर नंबर के आधार पर यूएचआईडी जियो टैगिंग वाले स्टिकर चिपकाए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया के माध्यम से आयोग बाद में प्रत्येक घर को आसानी से पहचानकर सर्वेक्षण कर सकेगा।
37 लाख घर होंगे कवर
अधिकारियों का कहना है कि हेस्कॉम के अधीन आने वाले जिलों—धारवाड़, बेलगावी, हावेरी, बागलकोट, गदग, विजयपुर और उत्तर कन्नड़ में कुल 37 लाख घर चिह्नित किए गए हैं। इन सभी घरों पर आरआर नंबर के आधार पर स्टिकर लगाने का काम जारी है। हेस्कॉम के लगभग 3,000 कर्मचारी इस कार्य में जुटे हुए हैं। 10 सितंबर तक यह कार्य अधिकांश क्षेत्रों में पूरा हो जाएगा।
जिलावार प्रगति
अब तक कई जिलों में स्टिकर लगाने का काम तेज गति से आगे बढ़ा है।
गदग जिले में 81 प्रतिशत, बागलकोट में 80.22 प्रतिशत, विजयपुर में 78.08 प्रतिशत, हावेरी में 76.76 प्रतिशत, धारवाड़ में 60.97 प्रतिशत, बेलगावी में 59.57 प्रतिशत, उत्तर कन्नड़ में 54.17 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।
जिलों में घरों की संख्या और स्टिकर चिपकाने का लक्ष्य भी तय है। उदाहरण के तौर पर बेलगावी जिले में 7.31 लाख, धारवाड़ में 3.59 लाख, बागलकोट में 4.11 लाख, विजयपुर में 3.81 लाख, हावेरी में 3.34 लाख, गदग में 2.41 लाख और उत्तर कन्नड़ में 2.41 लाख घरों पर स्टिकर लगाए जा रहे हैं।
सर्वेक्षण में कोई घर छूट न जाए
इस प्रक्रिया के दौरान यह भी सामने आया है कि कई घरों के पास बिजली मीटर का आरआर नंबर नहीं है। हेस्कॉम क्षेत्र में ऐसे 1.98 लाख से अधिक घर पाए गए हैं। इनमें गदग के 15,115, बागलकोट के 38,010, विजयपुर के 58,881, हावेरी के 18,740, धारवाड़ के 10,696, बेलगावी के 49,207 और उत्तर कन्नड़ के 7,566 घर शामिल हैं। इन घरों की पहचान ग्राम लेखाधिकारी और पंचायत विकास अधिकारी करेंगे। इसके बाद वहां जियो टैगिंग की जाएगी ताकि सर्वेक्षण में कोई घर छूट न जाए।
पर घर-घर सर्वेक्षण शुरू
20 सितंबर के बाद पिछड़ा वर्ग आयोग इन स्टिकरों के आधार पर घर-घर सर्वेक्षण शुरू करेगा। इस सर्वेक्षण के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी, जिसका उपयोग भविष्य की योजनाएं और नीतियां बनाने में किया जाएगा।
स्टिकर न हटाने की अपील
राज्य सरकार के निर्देश पर लगाए जा रहे यूएचआईडी स्टिकर को कोई भी व्यक्ति न हटाए। यह स्टिकर केवल बिजली विभाग का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि आगामी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सर्वेक्षण का आधार भी है। आयोग इन्हीं स्टिकरों के जरिए घर-घर पहुंचकर डेटा एकत्र करेगा।
–वैशाली एम.एल., प्रबंध निदेशक, हेस्कॉम

