संप्रदाय व्यवस्था है, शत्रुता नहीं: आचार्य विमलसागर सूरीश्वरसिकंदराबाद के विभिन्न जैन संघों, संस्थाओं और संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को कोरा-छावनी स्थित गायत्री गार्डन में आयोजित धर्मसभा उपस्थित श्रावक-श्राविकाएं।

समाज को आंतरिक मतभेदों से बचाना होगा

सिकंदराबाद में जैन समाज की विराट धर्मसभा, एकता का दिया संदेश

हैदराबाद। सिकंदराबाद के विभिन्न जैन संघों, संस्थाओं और संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को कोरा-छावनी स्थित गायत्री गार्डन में विराट धर्मसभा का आयोजन किया गया। पहली बार आयोजित इस सामूहिक कार्यक्रम में हैदराबाद, सिकंदराबाद और बोलाराम के विभिन्न जैन संघों के हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।

धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य विमलसागर सूरीश्वर ने कहा कि संप्रदाय केवल व्यवस्था है, लेकिन उसके नाम पर आपसी विवाद और शत्रुता का भाव समाज के लिए घातक है। आंतरिक मतभेदों के कारण समाज को लगातार नुकसान उठाना पड़ा है, जबकि वास्तविक चुनौतियों की ओर ध्यान नहीं जा पाता। समाज की शक्ति, बुद्धि और सामथ्र्य धर्म एवं समाज की उन्नति में लगनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि समाज समस्याओं से घिरा है तो व्यक्तिगत उपलब्धियों का कोई विशेष महत्व नहीं रह जाता। समाज और धर्म की रक्षा सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

इससे पूर्व आचार्य विमलसागर सूरीश्वर एवं गणिवर्य पद्मविमलसागर के नेतृत्व में पदयात्रा निकाली गई। विभिन्न जैन मंदिरों एवं स्थानक भवनों में उनका भव्य स्वागत किया गया। महिलाओं ने मंगल कलशों के साथ स्वागत किया तथा श्रद्धालुओं ने जयघोष किए।

कार्यक्रम में पानीबाई हिम्मतमल हंसराज कामदार परिवार की ओर से स्वामीवात्सल्य का आयोजन किया गया। आयोजकों ने बताया कि 23 जुलाई से एग्जिबिशन ग्राउंड स्थित जगद्गुरु हीरसूरी वाटिका में आचार्य के प्रवचन प्रारंभ होंगे, जबकि 26 जुलाई से प्रत्येक रविवार को 16 से 60 वर्ष आयु वर्ग के लिए जागरण सेमिनार आयोजित किए जाएंगे। समारोह के दौरान स्थानकवासी परंपरा के सौरवमुनि ने भी आचार्य विमलसागर सूरीश्वर से सद्भावनापूर्ण भेंट की।

 

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By Bharat Ki Awaz

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