तुंगभद्रा के नए गेटों की पहली बड़ी परीक्षा सफलतुंगभद्रा जलाशय।

भारी जलदबाव में भी मजबूती बरकरार

गेट और रबर सील से एक बूंद पानी भी नहीं रिसा

होसपेटे (विजयनगर)। तुंगभद्रा जलाशय के इतिहास में सबसे बड़ी चिंता पैदा करने वाली गेट दुर्घटना के करीब एक वर्ष बाद अब राहत की खबर सामने आई है। जलाशय में नवनिर्मित विशाल क्रेस्ट गेटों को पहली बार पर्याप्त जलदबाव का सामना करना पड़ा और उन्होंने इस महत्वपूर्ण परीक्षण में सफलता हासिल की है। नए गेटों पर आधिकारिक रूप से पानी का स्पर्श हो चुका है और भारी जलराशि के दबाव के बावजूद उनकी मजबूती बरकरार है।

सबसे आशाजनक बात यह है कि गेट के किनारों अथवा रबर सील से एक बूंद पानी भी रिसाव नहीं हो रहा है। गेट और कंक्रीट के बीच संपर्क भी पूरी तरह मजबूत पाया गया है।

2024 की दुर्घटना के बाद युद्धस्तर पर हुआ काम

10 अगस्त 2024 को जलाशय के अधिकतम जलस्तर के दौरान पुराने गेट की चेन टूटने से गेट उखडक़र गिर गया था। इस घटना ने राज्यभर के किसानों में चिंता पैदा कर दी थी। दुर्घटना के तुरंत बाद तकनीकी दल ने युद्धस्तर पर काम करते हुए महज एक सप्ताह के भीतर स्टॉप-लॉग गेट स्थापित कर पानी की भारी क्षति को रोका।

इसके बाद लगभग चार महीने के भीतर उसी स्थान पर अत्याधुनिक तकनीक से नया विशाल क्रेस्ट गेट स्थापित किया गया। ट्रायल रन, नई चेन प्रणाली लगाने और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं को भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

अब केवल आधिकारिक जल निकासी बाकी

नए गेटों के ऊपर वर्तमान में 10.68 फीट पानी सुरक्षित रूप से जमा है। गेट स्थापना के बाद सबसे बड़ी चुनौती जल रिसाव की होती है, लेकिन अब तक विशेषज्ञों की लगातार निगरानी में किसी प्रकार का रिसाव सामने नहीं आया है।

स्टॉप-लॉग गेट लगाने से लेकर नए गेट की स्थापना, चेन प्रणाली बदलने और जल संग्रह के सफल परीक्षण तक सभी महत्वपूर्ण चरण पूरे हो चुके हैं। अब नए गेटों के माध्यम से आधिकारिक रूप से पानी छोडऩा ही अंतिम चरण के रूप में बाकी है।

अत्याधुनिक सेंसरों से लगातार निगरानी

गेटों पर पहली बार जलदबाव पडऩे के कारण इंजीनियरों और विशेषज्ञों की विशेष टीम लगातार निगरानी कर रही है। गेट की प्रत्येक गतिविधि, उस पर पड़ रहे जलदबाव और यांत्रिक स्थिरता को अत्याधुनिक सेंसरों के माध्यम से दर्ज किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार अब तक सभी मानक निर्धारित सुरक्षा सीमाओं के भीतर हैं।

गेट सभी तकनीकी परीक्षणों में सफल

अनुभवी विशेषज्ञों और अत्याधुनिक तकनीक की मदद से नए गेटों को डिजाइन कर स्थापित किया गया है। पानी का स्पर्श होने के शुरुआती चरण में ही गेट सभी तकनीकी परीक्षणों में सफल रहे हैं। जल्द ही जलाशय के पूरी तरह भरने की उम्मीद है।
नारायण नायक, अधीक्षण अभियंता, तुंगभद्रा बोर्ड

आंकड़ों में नई उपलब्धि

10 अगस्त 2024: पुराने गेट की दुर्घटना
1 सप्ताह: स्टॉप-लॉग गेट की स्थापना
4 महीने: नए क्रेस्ट गेट की स्थापना
10.68 फीट: नए गेटों के ऊपर वर्तमान जलस्तर
एक बूंद भी रिसाव नहीं: अब तक की जांच में स्थिति सुरक्षित

 

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By Bharat Ki Awaz

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