एक माह पहले पकड़े गए 15 फुट लंबे अजगर की संतानों की आशंका, वन विभाग ने सुरक्षित जंगल में छोड़ा
दांडेली (उत्तर कन्नड़). दांडेली के अंबेवाड़ी स्थित विश्वेश्वरय्या प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वीटीयू) कौशल विकास केंद्र परिसर में एक साथ 16 अजगर के बच्चे मिलने से छात्रों, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में चिंता का माहौल पैदा हो गया। सूचना मिलते ही वन विभाग तथा सर्प विशेषज्ञ रजाक की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी अजगर शावकों को सुरक्षित पकडक़र जंगल में छोड़ दिया।
परिसर में घूमते दिखे अजगर के बच्चे
कॉलेज परिसर और खेल मैदान के आसपास घूम रहे छात्रों की नजर सबसे पहले जमीन पर रेंगते कुछ अजगर शावकों पर पड़ी। प्रारंभ में कुछ ही बच्चे दिखाई दिए, लेकिन गहन खोजबीन के दौरान कुल 16 अजगर के बच्चे मिले। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी।
विशेषज्ञों ने चलाया बचाव अभियान
वन विभाग के कर्मचारियों के साथ सर्प विशेषज्ञ रजाक और उनकी टीम ने परिसर के विभिन्न हिस्सों में फैले सभी शावकों को सुरक्षित पकड़ लिया। समय रहते कार्रवाई होने से किसी प्रकार की अनहोनी नहीं हुई। बाद में सभी अजगर शावकों को वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
क्या एक माह पहले मिले विशाल अजगर की संतानें हैं?
करीब एक माह पूर्व इसी परिसर में लगभग 15 फुट लंबा एक विशाल अजगर दिखाई दिया था, जिसे भी रजाक और उनकी टीम ने पकडक़र जंगल में छोड़ा था। अब मिले 16 शावकों को उसी अजगर की संतानों के रूप में देखा जा रहा है। वन विभाग इस संभावना की भी जांच कर रहा है कि अजगर ने परिसर में ही अंडे दिए थे, जिनसे ये बच्चे निकले हैं।
छात्रों ने उठाई सुरक्षा की मांग
वन क्षेत्र के निकट स्थित इस परिसर में पहले भी तेंदुए, अजगर और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही देखी जा चुकी है। लगातार ऐसी घटनाओं से विद्यार्थियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। छात्रों और कर्मचारियों का कहना है कि मजबूत चारदीवारी के अभाव में जंगली जीव आसानी से परिसर में प्रवेश कर रहे हैं।
उन्होंने परिसर के चारों ओर मजबूत सुरक्षा दीवार निर्माण, झाडिय़ों की सफाई, वन्यजीव निगरानी व्यवस्था और रात्रिकालीन गश्त की मांग की है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरणीय बदलाव, खाद्य संकट और जंगलों पर बढ़ते दबाव के कारण वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों से बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता है।
यह घटना केवल एक बचाव अभियान नहीं, बल्कि वन क्षेत्रों से सटे शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा प्रबंधन को मजबूत करने की आवश्यकता का भी स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।
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