‘लैबियो क्रोफिश’ ने वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा
गहरे काले रंग की दुर्लभ मीठे पानी की मछली की पहचान
पश्चिमी घाट की जैव विविधता में नई उपलब्धि
मेंगलूरु. कर्नाटक के कावेरी नदी जलग्रहण क्षेत्र में मीठे पानी की एक नई मछली प्रजाति की पहचान की गई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय मत्स्य आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (आईसीएआर-एनबीएफजीआर) के वैज्ञानिकों ने स्थानीय स्तर पर ‘क्रोफिश’ के नाम से पहचानी जाने वाली गहरे काले रंग की मछली को वैज्ञानिक रूप से नई प्रजाति के रूप में दर्ज किया है। इस नई प्रजाति का नाम ‘लैबियो कागे’ रखा गया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, मीठे पानी की जैव विविधता पर किए गए अध्ययन के दौरान यह दुर्लभ मछली उनके ध्यान में आई। इसके शरीर की बनावट, रंग, पंखों की संरचना तथा आनुवंशिक विशेषताओं के विस्तृत विश्लेषण के बाद इसे एक नई प्रजाति के रूप में मान्यता दी गई।
यह शोध वैज्ञानिक राहुल जी. कुमार, चरण रवि, कृष्णप्रसून एन.पी. और वी.एस. बशीर के नेतृत्व में किया गया। अध्ययन के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शोध पत्रिका जर्नल ऑफ फिश बायोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने बताया कि ‘कागे’ नाम कन्नड़ भाषा के ‘कागे’ अर्थात ‘कौआ’ शब्द से प्रेरित है। मछली का गहरा काला रंग इस नामकरण का प्रमुख कारण है। यह प्रजाति पश्चिमी घाट की नदियों में पाई जाने वाली डार्क लैबियो समूह की मछलियों में शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी घाट की नदियां अभी भी अनेक दुर्लभ और वैज्ञानिक रूप से अप्रलेखित जलीय जीवों का आश्रय स्थल हैं। हालांकि, आवासीय क्षेत्रों का क्षरण, बांध निर्माण, प्रदूषण तथा नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव इन प्रजातियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।
प्रधान अन्वेषक वी.एस. बशीर ने कहा कि पर्यावरणीय बदलावों के कारण कई मीठे पानी की प्रजातियां संकट का सामना कर रही हैं। भारत की समृद्ध जलीय जैव विविधता के संरक्षण के लिए निरंतर वैज्ञानिक अनुसंधान और संरक्षण प्रयासों की आवश्यकता है।
लैबियो क्रोफिश की प्रमुख विशेषताएं
कर्नाटक के कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में खोजी गई नई प्रजाति।
गहरे काले रंग की दुर्लभ मीठे पानी की मछली।
आईसीएआर-एनबीएफजीआर के वैज्ञानिकों द्वारा पहचान।
शोध निष्कर्ष जर्नल ऑफ फिश बायोलॉजी में प्रकाशित।
पश्चिमी घाट की जैव विविधता में महत्वपूर्ण नई खोज।

