यूकेपी-3 में देरी से 10 वर्षों में 5,561 टीएमसी पानी बहाआलमट्टी बांध।

कर्नाटक का हिस्सा नहीं हो सका उपयोग

आलमट्टी बांध भरने के बावजूद सिंचाई परियोजना अधूरी

किसानों ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया

बागलकोट। कृष्णा नदी के जल बंटवारे को लेकर जहां कर्नाटक में कावेरी जल विवाद के समय तमिलनाडु को पानी छोडऩे का विरोध होता रहा है, वहीं दूसरी ओर आलमट्टी जलाशय में राज्य के हिस्से का पानी उपयोग न होने से पिछले 10 वर्षों में 5,561 टीएमसी पानी अविभाजित आंध्र प्रदेश की ओर बह जाने का मामला सामने आया है। इसका प्रमुख कारण कृष्णा ऊपरी सिंचाई परियोजना (यूकेपी) के तीसरे चरण का वर्षों से अधूरा पड़ा रहना बताया जा रहा है।

बांध लबालब, लेकिन परियोजना अधूरी

महाराष्ट्र में भारी वर्षा के कारण 123 टीएमसी क्षमता वाला आलमट्टी जलाशय भर चुका है। इस वर्ष अब तक जलाशय से 62.50 टीएमसी पानी छोड़ा जा चुका है, लेकिन राज्य अपने हिस्से का पूरा जल उपयोग नहीं कर पा रहा है।

177 टीएमसी पानी के उपयोग का अधिकार

कृष्णा जल विवाद न्यायाधिकरण ने वर्ष 2010 के अपने फैसले में कर्नाटक को प्रतिवर्ष 177 टीएमसी पानी उपयोग करने की अनुमति दी थी। किसानों का कहना है कि यदि यूकेपी का तीसरा चरण समय पर पूरा हो जाता तो कल्याण कर्नाटक और कित्तूर कर्नाटक के कई जिलों की 5.94 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचाई के दायरे में आ जाती।

भूमि अधिग्रहण बना सबसे बड़ा अवरोध

परियोजना के तहत आलमट्टी बांध की ऊंचाई 519.60 मीटर से बढ़ाकर 524.256 मीटर की जानी है। इसके लिए 1.33 लाख एकड़ भूमि अधिग्रहण और 20 गांवों के पुनर्वास की आवश्यकता है, लेकिन अब तक केवल 30,500 एकड़ भूमि ही अधिग्रहित हो सकी है।

लागत एक लाख करोड़ रुपए के पार

वर्ष 2014-15 में इस परियोजना की अनुमानित लागत 51,148 करोड़ रुपए थी, जो अब बढक़र एक लाख करोड़ रुपए से अधिक हो गई है। भूमि अधिग्रहण का मुआवजा भी बढ़ाकर सूखी भूमि के लिए 30 लाख रुपए प्रति एकड़ और सिंचित भूमि के लिए 40 लाख रुपए प्रति एकड़ कर दिया गया है।

यूकेपी डूब क्षेत्र हितरक्षा समिति के महासचिव प्रकाश अंतरगोंड ने कहा कि सरकार की ओर से पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं होने के कारण भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया बेहद धीमी है। उन्होंने कहा कि चार वर्ष में परियोजना पूरी करने का वादा किया गया था, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसे पूरा होने में अभी कई वर्ष और लग सकते हैं, जबकि प्रभावित किसान लंबे समय से मुआवजे के लिए भटक रहे हैं।

पिछले 10 वर्षों में आलमट्टी से छोड़ा गया पानी (टीएमसी में)

वर्ष : छोड़ा गया पानी (टीएमसी में)
2015-16 : 99
2016-17 : 325
2017-18 : 279
2018-19 : 468
2019-20 : 1171
2020-21 : 678
2021-22 : 637
2022-23 : 642
2023-24 : 225
2024-25 : 692
2025-26 : 345

 

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By Bharat Ki Awaz

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