विजयनगर में रेशम खेती का दायरा बढ़ा
शहतूत क्षेत्र 3,395 एकड़, कोकून उत्पादन भी बढ़ा
होसपेट (विजयनगर)। पारंपरिक फसलों के विकल्प और स्थिर आय के स्रोत के रूप में विजयनगर जिले के किसान अब बड़े पैमाने पर रेशम खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि जिले में शहतूत की खेती का क्षेत्र लगातार बढ़ा है। वर्ष 2021-22 में जहां शहतूत के बागान 2,201.90 एकड़ में थे, वहीं 2025-26 में यह बढक़र 3,395.31 एकड़ हो गया।
कोकून उत्पादन में भी बढ़ोतरी
रेशम खेती का क्षेत्र बढऩे के साथ कोकून उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2021-22 में जहां 17.65 लाख अंडे की चाकी का उपयोग हुआ था, वहीं 2025-26 में यह बढक़र 22.04 लाख हो गया। इसी अवधि में कोकून उत्पादन 12.75 लाख किलोग्राम से बढक़र 16.72 लाख किलोग्राम पहुंच गया। इससे किसानों की आय में भी वृद्धि हुई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
तुंगभद्रा किनारे किसानों को फायदा
तुंगभद्रा नदी के किनारे बसे किसानों को शहतूत की खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होना इस विस्तार का प्रमुख कारण है। इसके अलावा रेशम विभाग की सब्सिडी, चाकी पालन केंद्रों की तकनीकी सहायता और बाजार सुविधाएं किसानों के लिए सहायक साबित हो रही हैं। अन्य फसलों की तुलना में अपेक्षाकृत कम निवेश और नियमित आय भी किसानों को रेशम खेती के लिए प्रेरित कर रही है।
सालभर आय का जरिया
रेशम खेती किसानों को पूरे वर्ष आय उपलब्ध कराने वाली गतिविधि है। विभाग की सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन से कम समय में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा रहा है। अब विभाग आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से रेशमकीट पालन को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है, ताकि कोकून की गुणवत्ता में सुधार कर उसे बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जा सके।
अनुकूल मिट्टी और मौसम
जिले की जलवायु और मिट्टी की विशेषताएं रेशम खेती के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। विभाग का लक्ष्य तकनीक आधारित रेशम उत्पादन को बढ़ावा देकर कोकून की गुणवत्ता बढ़ाना और विजयनगर के रेशम को बाजार में विशिष्ट पहचान दिलाना है।
किसानों को मिल रहा बेहतर आर्थिक लाभ
जिले के किसान तेजी से रेशम खेती अपना रहे हैं। विभाग की ओर से रेशमकीट पालन गृह, चाकी पालन केंद्र और सब्सिडी की सुविधाएं किसानों तक पहुंचाई जा रही हैं। वैज्ञानिक पद्धतियां अपनाने से किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल रहा है। आने वाले दिनों में तकनीकी सहायता और बाजार प्रोत्साहन बढ़ाने के साथ रेशम खेती का क्षेत्र विस्तार करना विभाग की प्राथमिकता रहेगी।
–श्रीहर्ष, उपनिदेशक, रेशम विभाग, विजयनगर
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