सेनापुर का एक किलोमीटर क्षेत्र संक्रमित जोन घोषित
10 किमी दायरे में निगरानी, सूअरों की वैज्ञानिक तरीके से होगी कलिंग
कुंदापुर (उडुपी)। उडुपी जिले के कुंदापुर और बयंदूर क्षेत्र के जंगलों से सटे इलाकों में पिछले करीब डेढ़ महीने से जंगली सूअरों की मौत का सिलसिला सामने आने के बाद अब इसकी वजह अफ्रीकी स्वाइन फीवर (एएसएफ) होने की पुष्टि हुई है। सेनापुर के एक फार्म में पाले गए सूअरों की मौत भी इसी संक्रमण से होने की पुष्टि हुई है। राज्य में पहली बार जंगली सूअरों में इस बीमारी की पुष्टि होने से पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है।
कुंदबारंदाडी में मृत जंगली सूअर और सेनापुर के फार्म में मृत पालतू सूअर के नमूने पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बेंगलूरु स्थित भारतीय पशु स्वास्थ्य एवं जैविक संस्थान की प्रयोगशाला भेजे थे। बाद में पुष्टि के लिए नमूने देश की उच्च स्तरीय प्रयोगशाला भोपाल भेजे गए, जहां जांच में अफ्रीकी स्वाइन फीवर की पुष्टि हुई।
मनुष्यों में नहीं फैलता संक्रमण
कुंदापुर तालुक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रेमानंद ने स्पष्ट किया, कि अफ्रीकी स्वाइन फीवर केवल सूअरों में होने वाला वायरल रोग है। यह किसी भी परिस्थिति में मनुष्यों में नहीं फैलता। अनावश्यक भय की जरूरत नहीं है।
उन्होंने बताया कि सूअरों में होने वाले क्लासिकल स्वाइन फीवर और अन्य कुछ रोगों के उपचार एवं टीके उपलब्ध हैं, लेकिन अफ्रीकी स्वाइन फीवर का फिलहाल न तो कोई उपचार है और न ही टीका।
सेनापुर का एक किमी क्षेत्र संक्रमित जोन
सेनापुर स्थित फार्म में संक्रमण की पुष्टि के बाद जिला प्रशासन ने फार्म के आसपास एक किलोमीटर क्षेत्र को संक्रमित क्षेत्र घोषित किया है। इसके अलावा 10 किलोमीटर के दायरे को निगरानी क्षेत्र घोषित किया गया है।
निगरानी क्षेत्र में स्थित पालतू सूअर फार्मों से हर सप्ताह नमूने लिए जाएंगे और 90 दिनों तक निगरानी की जाएगी। इसके बाद नमूने नकारात्मक पाए जाने पर उन्हें भोपाल स्थित प्रयोगशाला भेजकर अंतिम पुष्टि कराई जाएगी। रिपोर्ट नकारात्मक आने पर क्षेत्र को रोगमुक्त घोषित किया जा सकेगा और इसके बाद फिर से सूअर पालन की अनुमति दी जाएगी।
संक्रमित क्षेत्र के सूअरों की होगी कलिंग
संक्रमित क्षेत्र में मौजूद सूअरों को एहतियाती उपाय के तौर पर वैज्ञानिक तरीके से स्टांपिंग आउट यानी कलिंग किया जाएगा। इसके लिए कुंदापुर में इलेक्ट्रिक स्टनिंग मशीन उपलब्ध कराई गई है। कलिंग के दौरान नष्ट किए गए सूअरों के लिए सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि संक्रमण की पुष्टि से पहले मर चुके सूअरों के लिए मुआवजे का प्रावधान नहीं है।
उडुपी जिला पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. रेड्डप्पा ने बताया कि संक्रमण पर नियंत्रण के लिए कुंदापुर के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के नेतृत्व में विशेष दल गठित किया गया है। कलिंग, नमूना संग्रह और स्वास्थ्य निगरानी सहित आवश्यक नियंत्रण उपाय विभिन्न विभागों के समन्वय से किए जा रहे हैं।
वैज्ञानिक उपायों से ही संक्रमण पर नियंत्रण संभव
पशु स्वास्थ्य एवं जैविक संस्थान, मेंगलूरु के क्षेत्रीय अनुसंधान अधिकारी डॉ. वसंत कुमार शेट्टी ने कहा कि अफ्रीकी स्वाइन फीवर वायरस से होने वाली अधिसूचित बीमारी है। राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्रवाई जरूरी है। यह मनुष्यों के लिए खतरनाक नहीं है, लेकिन संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक उपाय जरूरी हैं।
उन्होंने कहा कि अगले तीन महीनों तक जिला प्रशासन, पशुपालन, वन और अन्य विभाग मिलकर कड़े नियंत्रण उपाय करेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि कहीं मृत या बीमार सूअर दिखाई दें तो तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना दें और मृत सूअरों को सीधे न छुएं।
स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से अनावश्यक चिंता न करने की अपील करते हुए कहा है कि संक्रमण की रोकथाम के लिए आवश्यक एहतियाती कदम पहले ही उठाए जा रहे हैं।
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