पांच साल से गैरेज में दम तोड़ रही ‘चिगरी’खराब होकर खड़ी चिगरी बीआरटीएस बसें।

स्पेयर पार्ट्स का संकट, एसी-खिडक़ी बिना सफर को मजबूर यात्री

60 से ज्यादा बीआरटीएस बसें ठप

हुब्बल्ली. हुब्बल्ली-धारवाड़ की पहचान बन चुकी चिगरी बीआरटीएस बस सेवा आज अस्तित्व के संकट से गुजर रही है। उचित रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की भारी कमी के कारण बसें लगातार खराब होकर गैरेज में खड़ी हो रही हैं। हालत यह है कि पिछले पांच वर्षों में एक भी प्रमुख स्पेयर पार्ट विभाग द्वारा खरीदा नहीं गया, नतीजतन रोजाना 2-3 बसें बीच सडक़ पर जवाब दे रही हैं।

बसें लगातार ठप

जुड़वां शहरों के दो डिपो में कुल 100 बीआरटीएस बसों में से महज 80 बसें ही नियमित शेड्यूल पर चल पा रही हैं। इनमें से भी कई रोज खराब हो जाती हैं और मरम्मत के लिए महीनों तक डिपो में पड़ी रहती हैं। इससे यात्रियों और चालकों दोनों में असंतोष बढ़ रहा है।

पांच साल से ऑर्डर, फिर भी सप्लाई नहीं

अधिकारियों का कहना है कि चिगरी बसों के रखरखाव के लिए जरूरी रेडिएटर, गियर बॉक्स, इंजन, एसी, आईटीएस सिस्टम जैसे अहम स्पेयर पार्ट्स के लिए ऑर्डर दिए हुए पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक आपूर्ति नहीं हुई।

देश में कुल 104 चिगरी बसें ही हैं, जिनमें 100 हुब्बल्ली-धारवाड़ में और 4 अन्य राज्यों के हवाई अड्डों पर। कम संख्या के कारण चीन से स्पेयर पार्ट्स आयात करने पड़ते हैं। उत्तर पश्चिम कर्नाटक सडक़ परिवहन निगम ने कई बार करीब 10 करोड़ रुपए के स्पेयर पार्ट्स की तत्काल खरीद का प्रस्ताव भेजा, जो अब भी वित्त विभाग के पास लंबित है।

एसी बंद, खिडक़ी नहीं—यात्रियों की दुश्वारी

करीब 90 प्रतिशत बीआरटीएस बसों के एसी बंद पड़े हैं। छोटे-मोटे स्पेयर पार्ट्स तक उपलब्ध नहीं होने से समस्या और गंभीर हो गई है। यात्रियों को एसी और खिड़कियों के बिना दमघोंटू सफर करना पड़ रहा है। बसों की खस्ताहाल पर यात्रियों की चालकों से नोकझोंक आम बात हो गई है।

60 प्रतिशत बसें मरम्मत में

अधिकारियों का कहना है कि डिपो में इस समय 60 से अधिक बसें तकनीकी खराबियों के कारण खड़ी हैं। 10 से ज्यादा बसें महीनों से मरम्मत के बिना पड़ी हैं। इंजन ऑयल, एसी गैस किट, क्लच प्लेट, वायरिंग, टायर, ब्रेक पैड, रेडिएटर जैसे पुर्जे न होने से मरम्मत असंभव है। मजबूरी में साधारण बसों के पुर्जे लगाकर अस्थायी सेवा दी जा रही है।

किन पुर्जों की दरकार?

चिगरी बसों के लिए तत्काल एसी, इंजन, आईटीएस सिस्टम, रेडिएटर, गियर बॉक्स, क्लच, ब्रेक पैड, वाइपर, हेडलाइट, एसी गैस, टायर, बैटरी, ओ-रिंग्स, स्टॉप सूचना देने वाला अनाउंसमेंट सिस्टम और सेंसर कम्युनिकेशन डिवाइस सहित 10 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के स्पेयर पार्ट्स की जरूरत है।

‘जल्द आएंगे पुर्जे’

निगम के शहरी परिवहन तकनीकी अधिकारी का कहना है कि सचिव स्तर से कंपनियों को आपूर्ति के निर्देश दिए गए हैं। कुछ ही दिनों में स्पेयर पार्ट्स आने का भरोसा है।

हालांकि, पिछले पांच वर्षों से मिल रहे ऐसे ही आश्वासनों के बीच चिगरी सेवा की हालत बद से बदतर होती जा रही है।

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