बस नहीं, पैदल स्कूल जाने को मजबूर छात्रबस नहीं, पैदल स्कूल जाने को मजबूर छात्र

बीदर के गडिगौडग़ांव में परिवहन व्यवस्था चरमराई

महीने में कई बार बस नहीं आने से पढ़ाई प्रभावित

छह किलोमीटर पैदल चलने को विवश विद्यार्थी

हुलसूर (बीदर)। सरकार जहां प्रत्येक बच्चे को शिक्षा से जोडऩे का दावा कर रही है, वहीं बीदर जिले के हुलसूर तालुक के गडिगौडग़ांव के विद्यार्थियों को नियमित बस सेवा नहीं मिलने से रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गांव में माध्यमिक विद्यालय नहीं होने के कारण करीब 35 से 40 छात्र-छात्राएं प्रतिदिन हुलसूर कस्बे के विभिन्न विद्यालयों में पढऩे जाते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, बसवकल्याण डिपो की बस सुबह 8.45 से 9 बजे के बीच गांव पहुंचनी चाहिए, लेकिन महीने में चार-पांच बार बस नहीं आती। ऐसे में विद्यार्थियों को लगभग छह किलोमीटर पैदल स्कूल जाना पड़ता है। कुछ छात्र दोपहिया वाहन चालकों से मदद लेकर स्कूल पहुंचते हैं, जबकि कई बार छात्रों को अनुपस्थित रहना पड़ता है।

छात्राओं की सुरक्षा भी चिंता का विषय

बस नहीं आने के कारण छात्र देर से विद्यालय पहुंचते हैं और सुबह की कक्षाएं छूट जाती हैं। लंबी दूरी पैदल तय करने से होने वाली थकान का असर उनकी पढ़ाई और एकाग्रता पर भी पड़ रहा है। विशेषकर छात्राओं को सुनसान रास्ते से पैदल आने-जाने में असुरक्षा का सामना करना पड़ता है।

सामाजिक कार्यकर्ता सतीश स्वामी ने कहा कि यह स्थिति ग्रामीण विद्यार्थियों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने निर्धारित समय पर बस संचालन सुनिश्चित करने की मांग की।

इस संबंध में केएसआरटीसी बसवकल्याण डिपो के प्रबंधक सन्ना कुंटेप्पा ने कहा कि बस सेवा में व्यवधान के कारणों की जांच कराई जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा।

 

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By Bharat Ki Awaz

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