उत्तर कन्नड़ को धारवाड़ हाईकोर्ट पीठ से अलग न करें: एआईएलयूउत्तर कन्नड़ को धारवाड़ हाईकोर्ट पीठ से अलग नहीं करने की मांग को लेकर विधायक आर.वी. देशपांडे को ज्ञापन सौंपते हुए एआईएलयू के सदस्य।

मेंगलूरु पीठ के प्रस्ताव का विरोध

विधायक को ज्ञापन सौंपकर जनहित में पुनर्विचार की मांग

दांडेली (उत्तर कन्नड़). ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (एआईएलयू) के सदस्यों और उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं ने उत्तर कन्नड़ जिले को प्रस्तावित मेंगलूरु हाईकोर्ट पीठ के अधिकार क्षेत्र में शामिल करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। प्रतिनिधिमंडल ने विधायक आर.वी. देशपांडे को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि जिले को किसी भी स्थिति में धारवाड़ हाईकोर्ट पीठ के अधिकार क्षेत्र से अलग नहीं करना चाहिए।

अधिवक्ताओं का कहना है कि उत्तर कन्नड़ जिले के अधिकांश तालुकों के लिए धारवाड़ भौगोलिक दृष्टि से अधिक निकट है। सडक़ संपर्क, सार्वजनिक परिवहन और न्यायिक कार्यों की सुविधा को देखते हुए भी धारवाड़ अधिक उपयुक्त है। ऐसे में जिले को मेंगलूरु पीठ के अधीन करना अव्यावहारिक और जनहित के विरुद्ध होगा।

बढ़ेगी समय और खर्च की परेशानी

ज्ञापन में कहा गया है कि यदि मामलों की सुनवाई के लिए मेंगलूरु जाना पड़ा तो वादकारियों, अधिवक्ताओं, सरकारी अधिकारियों और गवाहों को अधिक दूरी तय करनी पड़ेगी। इससे समय और धन दोनों का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा तथा न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

एआईएलयू ने स्पष्ट किया कि उसे मेंगलूरु में नई हाईकोर्ट पीठ की स्थापना पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए पहले से धारवाड़ पीठ के अधीन उत्तर कन्नड़ जिले को अलग करना उचित नहीं होगा। संगठन ने सरकार से अंतिम निर्णय लेने से पहले जनप्रतिनिधियों, अधिवक्ता संगठनों और आम नागरिकों की राय लेने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल में रत्नदीपा, आफरीन कित्तूर, गिरीश भट्ट, विश्वनाथ हेगड़े और प्रवीण तरेकर सहित कई अधिवक्ता शामिल थे।

 

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By Bharat Ki Awaz

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