कडके गांव के ग्रामीण हर साल जान जोखिम में डालकर करते हैं आवाजाही, स्थायी पुल बनाने की मांग
उडुपी. तटीय कर्नाटक में मानसून की तेज बारिश के बीच उडुपी जिले के बयंदूर (बैंदूर) तालुक के कडके गांव के ग्रामीण बारिश से बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की अनदेखी के कारण हर वर्ष बारिश के मौसम में उनका गांव लगभग शेष क्षेत्र से कट जाता है।
यडतरे ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले कडके गांव में 50 से अधिक परिवार रहते हैं, जिनमें अधिकांश अनुसूचित जनजाति (एसटी) के गोंड समुदाय से हैं। ग्रामीणों की आजीविका कृषि, दिहाड़ी मजदूरी और वन उपज पर निर्भर है। गांव को ऊदूर, ओम्मणमक्की और कर्नगड्डे जैसे क्षेत्रों से जोडऩे वाले मार्ग पर बहने वाला नाला बारिश के दौरान उफान पर आ जाता है, जिससे सडक़ पूरी तरह जलमग्न हो जाती है।
लकड़ी के अस्थायी पुल का सहारा
ग्रामीण हर वर्ष अपने खर्च और श्रम से लकड़ी का अस्थायी पैदल पुल बनाते हैं, लेकिन तेज बहाव में वह कुछ ही दिनों में बह जाता है। इसके बाद लोगों को कई किलोमीटर दूर स्थित संकरे और जोखिम भरे अस्थायी मार्ग से आवागमन करना पड़ता है।
इस मार्ग से सैकड़ों छात्र-छात्राएं बैंदूर, शिरूर और कुंदापुर के स्कूलों एवं कॉलेजों तक पहुंचते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दिनों में महिलाओं, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हर चुनाव में पुल निर्माण का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद वादे भुला दिए जाते हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से किसी बड़ी दुर्घटना से पहले गांव में स्थायी पुल या सुरक्षित पैदल पुल का निर्माण कराने की मांग की है।
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