खर्च का इंतजाम खुद करेंगे विद्यालय
डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के निर्देश
बिना सरकारी अनुदान योजना के संचालन और रखरखाव की चुनौती
उडुपी. सरकारी विद्यालयों में छात्रों की सीखने की गुणवत्ता सुधारने और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सभी स्कूलों में ई-लर्निंग केंद्र स्थापित किए जाएंगे। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी पहल के लिए सरकार अलग से कोई वित्तीय सहायता उपलब्ध नहीं कराएगी। स्कूल शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि विद्यालय उपलब्ध अनुदान, दानदाताओं के सहयोग तथा पुराने कंप्यूटरों के पुन: उपयोग के माध्यम से इन केंद्रों की स्थापना करें।
ऑडियो-वीडियो आधारित होगी पढ़ाई
ई-लर्निंग केंद्र में प्रोजेक्टर, डिजिटल स्क्रीन, कंप्यूटर या लैपटॉप, कैमरा, ध्वनि प्रणाली और इंटरनेट सुविधा से युक्त एक कक्ष तैयार किया जाएगा। यहां पाठ्यपुस्तकों से संबंधित वीडियो, विज्ञान एवं गणित के प्रयोग, भाषा शिक्षण, कला, शिल्प, संगीत, खेल, पर्यावरण तथा जीवन कौशल से जुड़ी डिजिटल सामग्री के माध्यम से विद्यार्थियों को रोचक ढंग से पढ़ाया जाएगा। साथ ही विद्यालय के कार्यक्रम, छात्रों की प्रतिभा और विशेष व्याख्यानों का डिजिटल संग्रह भी किया जा सकेगा।
अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से विद्यार्थी देखकर, सुनकर और अनुभव के माध्यम से सीख सकेंगे। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को डिजिटल शिक्षा का लाभ मिलेगा तथा उनमें भाषा कौशल, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी समझ, रचनात्मकता और स्व-अध्ययन की क्षमता विकसित होगी।
रखरखाव सबसे बड़ी चुनौती
योजना की सफलता उपकरणों के नियमित रखरखाव पर निर्भर करेगी। कंप्यूटर, प्रोजेक्टर और अन्य डिजिटल संसाधनों की समय-समय पर जांच, सॉफ्टवेयर अपडेट, सुरक्षित विद्युत आपूर्ति, निर्बाध इंटरनेट और उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना विद्यालयों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी। शिक्षकों को डिजिटल उपकरणों के प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण देना और सभी कक्षाओं के लिए उपयोग का समय निर्धारित करना भी आवश्यक होगा। इंटरनेट का मासिक खर्च भी कई स्कूलों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है।
कमरों की कमी भी बनेगी बाधा
ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश सरकारी विद्यालय पहले से ही कक्षाओं की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में ई-लर्निंग केंद्र के लिए अलग कमरा उपलब्ध कराना आसान नहीं होगा। इसके अलावा, पहले से दानदाताओं और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत उपलब्ध कराए गए कई प्रोजेक्टर, कंप्यूटर और डिजिटल स्क्रीन रखरखाव, तकनीकी सहायता, बिजली, इंटरनेट और प्रशिक्षित शिक्षकों के अभाव में निष्क्रिय पड़े हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन संसाधनों के लिए स्थायी रखरखाव व्यवस्था विकसित किए बिना नई योजना की सफलता प्रभावित हो सकती है।
ई-लर्निंग केंद्र स्थापित करने के दिए निर्देश
विभाग की वार्षिक कार्ययोजना में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए ई-लर्निंग केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। कई विद्यालयों ने इस दिशा में तैयारी भी शुरू कर दी है, लेकिन इन केंद्रों का नियमित संचालन और रखरखाव ही इसकी वास्तविक सफलता तय करेगा।
–लोकेश, डीडीपीआई, उडुपी
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