कानून शिक्षा में एआई की भूमिका पर बलधारवाड़ में कर्नाटक राज्य विधि विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए न्यायाधीश शिवराज वी. पाटील।

दीक्षांत समारोह में न्यायाधीश पाटील ने कहा

राज्यपाल गहलोत बोले- छात्रों को डिजिटल युग की चुनौतियों की समझ जरूरी

हुब्बल्ली. कर्नाटक राज्य विधि विश्वविद्यालय के सातवें दीक्षांत समारोह में कानून शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल तकनीक की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।

समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित न्यायाधीश शिवराज वी. पाटील ने कहा कि आज के कानून छात्रों को बहस की कला के साथ-साथ साइबर अपराध, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक चुनौतियों की समझ भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि कानून शिक्षा अब बहुआयामी हो गई है, जिसमें अंतरविषयक प्रशिक्षण, आलोचनात्मक सोच और निरंतर अध्ययनशीलता आवश्यक है। एआई का प्रयोग न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने, अभिलेख प्रबंधन और निर्णय अनुवाद जैसे क्षेत्रों में सहायक हो सकता है, लेकिन तकनीक न्याय का विकल्प नहीं, बल्कि साधन होना चाहिए।

कर्नाटक के विधि मंत्री एच.के. पाटील ने कहा कि राज्य में कानून शिक्षा निदेशालय की स्थापना की गई है और उत्तर कर्नाटक में अधिवक्ताओं के लिए प्रशिक्षण अकादमियां शुरू की गई हैं। न्यायपालिका में एआई तकनीक लागू कर कार्यक्षमता बढ़ाई जाएगी।

राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि कानून समाज की आत्मा है और छात्रों को समकालीन तकनीकी और वैश्विक मुद्दों की समझ विकसित करनी चाहिए।

समारोह में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल एस. अब्दुल नजीर और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. सुधीश पाई को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। इस अवसर पर कुलपति प्रो. सी. बसवराजु, अभिनेत्री सुधाराणी समेत कई उपस्थित थे।

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