पिछले साल की बाढ़ और अतिवृष्टि से उबरकर कर रहे खेतों को तैयार
कृषि विभाग ने तय किया 4 लाख हेक्टेयर बुवाई का लक्ष्य
यादगीर. जिले में पिछले वर्ष अतिवृष्टि और भीमा नदी की बाढ़ से भारी नुकसान झेलने वाले किसान अब नए उत्साह के साथ खरीफ सीजन की तैयारियों में जुट गए हैं। मानसून पूर्व हल्की बारिश के बीच किसान खेतों की सफाई, मिट्टी की तैयारी और खाद डालने का काम तेजी से कर रहे हैं।
जिले के कई हिस्सों में बादल छाने और गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो रही है, हालांकि तेज हवाओं के कारण मौसम लगातार बदल रहा है। इसके बावजूद किसान आगामी मानसून बुवाई को लेकर पूरी तैयारी में लगे हुए हैं। खेतों से खरपतवार हटाए जा रहे हैं, मिट्टी को समतल कर वर्षा जल संरक्षण की व्यवस्था की जा रही है तथा जैविक खाद डालकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही कृषि उपकरणों की मरम्मत भी कराई जा रही है।
कृषि विभाग ने इस वर्ष जिले में 4,02,045 हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया है। विभाग ने किसानों के लिए बीज और उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण भी कर लिया है।
कपास और धान की खेती पर जोर
कृष्णा नदी के प्रभाव वाले इस क्षेत्र में धान और कपास प्रमुख फसलें हैं। इस वर्ष लगभग 2.02 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 97,648 हेक्टेयर में धान, 85 हजार हेक्टेयर में जीआई टैग प्राप्त अरहर, 13,600 हेक्टेयर में मूंग तथा अन्य क्षेत्रों में तिलहन और मोटे अनाज की खेती की योजना बनाई गई है।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक रतेन्द्रनाथ सूगुर ने कहा कि किसानों को पर्याप्त वर्षा होने तक बुवाई नहीं करनी चाहिए। करीब 90 मिमी बारिश के बाद जब मिट्टी पर्याप्त नमी बनाए रखे, तभी बुवाई करना उचित रहेगा। फिलहाल हो रही प्री-मानसून बारिश खेती के लिए पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने किसानों से जल्दबाजी में बीज बोने से बचने और मानसून पूरी तरह सक्रिय होने के बाद ही खेती शुरू करने की अपील की है।
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