चिक्कमगलूरु में किसानों की बढ़ी चिंता
कई तालुकों में बोरवेल सूखने का खतरा
चिक्कमगलूरु. जिले में प्री-मानसून बारिश की कमी के चलते भूजल स्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। अप्रेल और मई में सामान्य से कम वर्षा होने के कारण किसानों में चिंता बढ़ गई है कि आने वाले दिनों में बोरवेल और जलस्रोत और अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
पिछले वर्ष मार्च महीने से ही प्री-मानसून बारिश शुरू हो गई थी, जिससे तालाबों और जलाशयों में पर्याप्त पानी पहुंचा था। इसके कारण गर्मियों के दौरान भी भूजल स्तर में सुधार देखा गया था। लेकिन इस वर्ष स्थिति अलग है। अप्रेल में जिले में सामान्य से 20 प्रतिशत कम बारिश हुई, जबकि मई में अब तक 8 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है।
कोप्पा और एन.आर.पुरा में सबसे अधिक असर
विशेष चिंता की बात यह है कि अधिक वर्षा वाले मलेनाडु क्षेत्र के कोप्पा और नरसिंहराजपुर तालुकों में भी भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, कोप्पा तालुक में पिछले 11 वर्षों से भूजल स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। वहीं नरसिंहराजपुर क्षेत्र में भी जलस्तर घटने से भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, शृंगेरी और मूडिगेरे तालुकों में भूजल स्तर में हल्का सुधार देखा गया है, जिससे कुछ राहत मिली है।
बोरवेल पर नियंत्रण से कडूर में सुधार
अज्जमपुर तालुक में पिछले 10 वर्षों से भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। कडूर तालुक में वर्ष 2014 से 2017 के बीच स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी और जलस्तर 27.86 मीटर गहराई तक पहुंच गया था। इसके बाद प्रशासन ने अनियंत्रित बोरवेल खुदाई पर रोक लगाई और ड्रिप तथा स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया। अधिकारियों का कहना है कि इससे कुछ सुधार हुआ है, हालांकि पिछले साल की तुलना में इस बार कडूर में भी भूजल स्तर लगभग एक मीटर नीचे गया है।
किसानों का कहना है कि प्री-मानसून बारिश नहीं होने से अधिकांश तालाब खाली पड़े हैं। यदि मानसून में भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो अगले गर्मी सीजन में पानी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
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