मंड्या जिला सबसे अधिक प्रभावित
7 लाख से ज्यादा जल नमूनों की जांच में खुलासा
हुब्बल्ली. कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में दूषित पेयजल की समस्या गंभीर होती जा रही है। राज्य सरकार द्वारा कराई गई जांच में 31 जिलों के 4673 गांवों में पानी की गुणवत्ता खराब पाई गई है। ग्रामीण विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 7 लाख से अधिक पानी के नमूनों की जांच की गई, जिनमें बड़ी संख्या में नमूने दूषित पाए गए।
सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2023-24 में 2,51,763 नमूनों की जांच हुई, जिनमें 24,917 नमूने दूषित निकले। वर्ष 2024-25 में 2,72,166 नमूनों की जांच में 17,261 नमूने खराब पाए गए, जबकि 2025-26 में जांचे गए 2,23,734 नमूनों में से 12,127 नमूनों में प्रदूषण की पुष्टि हुई। कई गांवों में पानी में नाइट्रेट, लवण और अन्य रासायनिक तत्व निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए हैं।
जिलावार आंकड़ों में मंड्या सबसे अधिक प्रभावित जिला बनकर सामने आया है, जहां 423 गांवों में दूषित पानी की समस्या दर्ज की गई। इसके बाद कोप्पल और तुमकूरु में 387-387 गांव, विजयपुर में 375, चित्रदुर्ग में 324 और बेलगावी में 274 गांव प्रभावित पाए गए। वहीं शिवमोग्गा, बेंगलूरु शहर और उडुपी जैसे जिलों में अपेक्षाकृत कम मामले सामने आए हैं।
हजारों गांवों में लगाए गए शुद्ध पेयजल संयंत्र
दूषित पानी की समस्या से निपटने के लिए सरकार प्रभावित गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठा रही है। मंड्या में 281, कोप्पल में 326, तुमकूरु में 300 और विजयपुर में 284 शुद्ध पेयजल इकाइयां स्थापित की गई हैं। इसके अलावा राज्यभर में 18 हजार से अधिक गांवों में जल शुद्धिकरण संयंत्र लगाए जा चुके हैं।
सरकार का कहना है कि जिन क्षेत्रों में पानी दूषित पाया गया है, वहां प्राथमिकता के आधार पर आसपास के सुरक्षित स्रोतों से स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा रहा है। साथ ही, जहां सतही जल उपलब्ध है, वहां बहु-ग्रामीण पेयजल योजनाएं लागू कर स्थायी समाधान की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
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