कृष्णा नदी के पानी पर महाराष्ट्र की हठधर्मिताहिप्परगी बैराज।

हिप्परगी बैराज सूखने की कगार पर

बागलकोट-बेलगावी में पेयजल संकट गहराया

बागलकोट. उत्तर कर्नाटक की जीवनदायिनी कृष्णा नदी में पानी छोडऩे की कर्नाटक सरकार की अपील पर महाराष्ट्र सरकार की ओर से अब तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है। बागलकोट और बेलगावी जिलों में गहराते पेयजल संकट के बीच हिप्परगी बैराज के लिए कोयना जलाशय से 2 टीएमसी पानी छोडऩे की मांग की गई थी, लेकिन महाराष्ट्र सरकार ने अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया है।

भीषण गर्मी के कारण हिप्परगी बैराज का जलस्तर डेड स्टोरेज तक पहुंच गया है। 6 टीएमसी क्षमता वाले बैराज में फिलहाल केवल 0.50 टीएमसी पानी शेष है, जिससे पेयजल आपूर्ति पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

करीब डेढ़ माह पहले कर्नाटक के जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव ने महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिखकर पानी छोडऩे का अनुरोध किया था। राज्य के मुख्य सचिव ने भी महाराष्ट्र सरकार से इस विषय पर चर्चा की। दोनों राज्यों के बीच हुए सौहार्द समझौते के तहत 2 टीएमसी पानी छोडऩे की मांग की गई थी, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।

महाराष्ट्र के महाबलेश्वर के निकट स्थित कोयना बांध से निकलने वाला पानी बेलगावी, बागलकोट और विजयपुर जिलों से होकर आंध्र प्रदेश तक पहुंचता है। दशकों से गर्मियों में कोयना बांध से पानी छोड़े जाने की परंपरा रही है। इसके लिए प्रति टीएमसी चार लाख रुपए का भुगतान भी किया जाता है। वर्तमान में कोयना जलाशय में पर्याप्त जल भंडारण होने के बावजूद महाराष्ट्र की ओर से पानी छोडऩे में टालमटोल की जा रही है।

हिप्परगी बैराज बागलकोट और बेलगावी जिलों के दो लाख से अधिक लोगों के लिए पेयजल का प्रमुख स्रोत है। इसके अलावा करीब 60 हजार एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई भी इसी पर निर्भर है। कुछ महीने पहले बैराज का गेट टूटने से लगभग 2 टीएमसी पानी बह गया था, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

जिलाधिकारी संगप्पा एम. ने बताया कि कोयना जलाशय से पानी छोडऩे के लिए महाराष्ट्र सरकार से लगातार आग्रह किया जा रहा है। इस संबंध में कोल्हापुर के जिलाधिकारी से भी बातचीत कर अनुरोध किया गया है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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