10 महिला न्यायाधीशों की सात पीठों ने 540 से अधिक मामलों की सुनवाई की
महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल
धारवाड़। कर्नाटक उच्च न्यायालय की धारवाड़ पीठ ने शनिवार को न्यायिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ते हुए महिला सशक्तिकरण की अद्वितीय मिसाल पेश की। पूरे दिन न्यायालय की सभी न्यायिक कार्यवाहियां केवल महिला न्यायाधीशों ने संचालित कीं। 10 महिला न्यायाधीशों की सात पीठों ने 540 से अधिक मामलों की सुनवाई, आदेश, स्थगन और निर्णय की प्रक्रिया पूरी कर देश ही नहीं, विश्व स्तर पर भी एक ऐतिहासिक उदाहरण स्थापित किया।
महिला न्यायाधीशों ने संभाली पूरी न्यायिक व्यवस्था
मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू के निर्देश पर यह विशेष पहल लागू की गई। तीन द्वैध (डिवीजन) पीठों और चार एकल पीठों का गठन किया गया, जिन्होंने दिनभर निर्बाध रूप से न्यायिक कार्य संपन्न किए। कुल 375 मामलों का निस्तारण हुआ, जबकि दो मामलों में निर्णय सुरक्षित रखा गया।
महिला अधिवक्ताओं में दिखा उत्साह
अदालत परिसर में महिला अधिवक्ताओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। वे न केवल प्रभावी ढंग से अपने मुवक्किलों की पैरवी करती रहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक अवसर को कैमरे में भी संजोती नजर आईं। महिला कर्मचारियों ने भी न्यायिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई।
धारवाड़ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बी.डी. हिरेमठ ने इसे विश्व न्यायिक इतिहास की गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। अधिवक्ता आरती मुतालिक देसाई और युवा अधिवक्ता संजना मुधोल ने कहा कि यह पहल न्यायपालिका में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
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