देवेंद्र दृष्टि चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ
विशेषज्ञों ने कला शिक्षा और सृजनशीलता को बताया व्यक्तित्व विकास का आधार
हुब्बल्ली. स्कूल शिक्षा विभाग के जिला उपनिदेशक उमेश बम्मक्कनवर ने कहा कि यदि बच्चों को कला का संस्कार दिया जाए तो वे मोबाइल फोन की लत से दूर रहेंगे। उनकी रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उसी के अनुरूप शिक्षा देनी चाहिए।
वे विद्यनगर स्थित डॉ. एम.वी. मिणजगी कला दीर्घा में चित्रकार देवेंद्र बडिगेर की एकल चित्रकला प्रदर्शनी देवेंद्र दृष्टि के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
कला देती है नई सोच और संस्कार
उमेश बम्मक्कनवर ने कहा कि चित्रकला रंग, रेखा, आकार और कल्पना का सुंदर समन्वय है। कला मन को सुकून देती है, नई कल्पनाओं को जन्म देती है और बच्चों में संवेदनशीलता व संस्कार विकसित करती है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को नियमित रूप से कला दीर्घाओं में ले जाने का आग्रह किया, ताकि उनमें सृजनात्मक सोच विकसित हो सके।
एआई से कलाकारों के सामने नई चुनौती
लोककला कलाकार रमेश करबसम्मनवर ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते प्रभाव से कलाकारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। तकनीक के इस दौर में कलाकारों को अपनी मौलिकता और रचनात्मकता बनाए रखनी होगी तथा इसके लिए अनुकूल वातावरण और पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने चाहिए।
कुरुविनकोप्पा सरकारी हाईस्कूल की प्रधानाध्यापिका रेणुका गौडऱ ने कहा कि चित्रकला शिक्षक बच्चों की सृजनात्मक क्षमता को निखारने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं और उनके सपनों को रंगों के माध्यम से अभिव्यक्ति देते हैं।
धारवाड़ जिला चित्रकला शिक्षक संघ के अध्यक्ष बसवराज तोटगी ने कहा कि “एक चित्र हजार शब्दों के बराबर होता है।” चित्रों के माध्यम से शिक्षा देने से बच्चों की कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता का बेहतर विकास होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एम.वी. मिणजगी कला दीर्घा समिति के अध्यक्ष रामचंद्र गरग ने की। इस अवसर पर रविशंकर पत्तार सहित अनेक कला प्रेमी, शिक्षक और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
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