जैन संतों एवं साध्वियों की सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
सकल जैन समाज ने की हाईवे पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की मांग
हुब्बल्ली. देशभर में पदयात्रा के दौरान जैन संतों एवं साध्वियों के साथ हो रही सडक़ दुर्घटनाओं तथा बढ़ती मृत्यु की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए सकल जैन समाज, हुब्बल्ली ने प्रधानमंत्री के नाम धारवाड़ की जिलाधिकारी स्नेहल आर. को विस्तृत ज्ञापन सौंपा। समाज ने संतों की सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता का विषय बताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
यह ज्ञापन प्रधानमंत्री 15 सूत्रीय अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम समिति के सदस्य महेंद्र सिंघी के नेतृत्व में सौंपा गया। इस अवसर पर गौतम भुरट, शैलेश जैन, विमल तालिकोटी, संतोष पाटिल, संतोष डूमावत, नीलेश जैन, विमल मांडोत, मनोज कोठारी, अमित जैन, तरुण जैन, धर्मेंद्र जैन, जितेंद्र जैन एवं सुभाष डंक सहित अनेक समाजबंधु उपस्थित थे।
अहिंसा और तपस्या की परंपरा पर बढ़ता संकट
ज्ञापन में कहा गया है कि जैन संत एवं साध्वियां सदियों से अहिंसा, त्याग और तपस्या की परंपरा का निर्वहन करते हुए नंगे पैर पदयात्रा करते हैं तथा समाज में शांति, सद्भाव और नैतिक मूल्यों का संदेश फैलाते हैं। किंतु हाल के वर्षों में राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर उनके साथ दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाएं अत्यंत चिंताजनक और पीड़ादायक हैं।
ज्ञापन में रखी गईं प्रमुख मांगें
सकल जैन समाज ने केंद्र सरकार से राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों के किनारे संतों एवं अन्य पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित पैदल यात्री कॉरिडोर बनाने की मांग की है। इसके अलावा राजमार्गों पर चेतावनी संकेतक, गति नियंत्रण व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुरक्षा उपाय अनिवार्य रूप से स्थापित करने का आग्रह किया गया है।
समाज ने दुर्घटनाओं एवं मृत्यु की घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराने, वाहन चालकों को जैन संतों एवं पैदल यात्रियों की सुरक्षा के प्रति जागरूक करने तथा ड्राइविंग लाइसेंस प्रशिक्षण में इस विषय को शामिल करने की भी मांग रखी है।
विशेष हाईवे पेट्रोलिंग की मांग
ज्ञापन में प्रात: 4 से 8 बजे तथा शाम 5 से 6.30 बजे तक विशेष हाईवे पेट्रोलिंग एवं निगरानी व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है, ताकि पदयात्रा के दौरान संतों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
राष्ट्रीय दायित्व का विषय
सकल जैन समाज ने कहा कि जैन संतों की सुरक्षा केवल किसी एक समुदाय का विषय नहीं, बल्कि मानवीय, संवैधानिक एवं राष्ट्रीय उत्तरदायित्व का प्रश्न है। भारत की संस्कृति सदैव संत-महात्माओं एवं आध्यात्मिक परंपराओं के सम्मान और संरक्षण की रही है।
समाज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस विषय में त्वरित हस्तक्षेप कर आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू करने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। ज्ञापन की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, केंद्रीय गृह मंत्री, केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, केंद्रीय मंत्री एवं धारवाड़ के सांसद प्रल्हाद जोशी तथा कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों सहित विभिन्न प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है।
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