कल्याणकारी परियोजना के लिए जमीन लेने के बाद मुआवजा नहीं देने पर अदालत की कार्रवाई
कलबुर्गी। गृह मंत्री प्रियांक खरगे के साथ अधिकारियों की बैठक चल रही थी, उसी दौरान बाहर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की कारें अदालत के कर्मचारियों ने जब्त कर लीं। इस घटना से जिलाधिकारी समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा।
कलबुर्गी के मिनी विधानसौधा में गृह मंत्री के साथ अधिकारियों की बैठक चल रही थी। इसी दौरान कलबुर्गी जिला न्यायालय के आदेश पर अदालत के कर्मचारियों ने जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी और सहायक आयुक्त की कारें जब्त कर लीं।
किसान को मुआवजा देने में हुई देरी
मामला नंदिकूर गांव में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे से जुड़ा है। वर्ष 2009 में किसान प्रकाश मल्कप्पा की 2 एकड़ 11 गुंटा जमीन का अधिग्रहण किया गया था। इसके बावजूद किसान को लंबे समय तक मुआवजा नहीं मिला।
मुआवजे में देरी के बाद किसान ने 2018 में अदालत का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के बाद अदालत ने किसान को उचित मुआवजे के रूप में करीब 8 करोड़ रुपए देने का आदेश दिया। हालांकि, आदेश के बाद भी प्रशासन ने पूरी राशि का भुगतान नहीं किया और किसान को केवल 10 लाख रुपए दिए गए।
अदालत पहुंचा मामला, कारें हुईं जब्त
पूरी राशि नहीं मिलने पर प्रकाश मल्कप्पा ने दोबारा अदालत में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान अदालत ने मुआवजा देने के निर्देश के साथ अधिकारियों के वाहनों की जब्ती का आदेश दिया। इसी आदेश के तहत जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी और उपविभागीय अधिकारी की कारें जब्त की गईं।
किसान प्रकाश मल्कप्पा ने कहा कि आसपास के अन्य किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा मिल चुका है, लेकिन उन्हें अब तक उचित भुगतान नहीं मिला। अदालत ने कम से कम 50 प्रतिशत मुआवजा तत्काल जारी करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद भुगतान नहीं होने पर अब अधिकारियों की कारें जब्त करने की कार्रवाई हुई है।
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