सफाईकर्मियों को पक्का घर अब भी दूरसिरसी के मराठीकोप्पा के विशाल नगर में निर्माणाधीन सफाईकर्मियों का आवासीय भवन।

उत्तर कन्नड़ में 101 आवास अटके

कारवार। शहरों और कस्बों को स्वच्छ रखने वाले सफाईकर्मियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक आवास की व्यवस्था अब भी चुनौती बनी हुई है। सफाईकर्मियों के लिए शुरू की गई गृहभाग्य योजना उत्तर कन्नड़ जिले में अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रही है। विभिन्न नगर निकायों के अंतर्गत मंजूर 101 आवास अब भी प्रक्रिया में अटके हैं।

कई स्थानों पर आवासों के लिए भूखंड उपलब्ध नहीं होने से योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है। कुछ जगहों पर टेंडर प्रक्रिया में देरी हो रही है। कारवार के पंचराशिवाड़ा में कुछ वर्ष पहले सफाईकर्मियों के लिए बहुमंजिला आवास परिसर बनाया गया था, लेकिन अभी भी कई कर्मचारी अपने घर की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

कारवार में जमीन पर कब्जे से अटका काम

नगरपालिका अधिकारियों के अनुसार, गांधी नगर में सफाईकर्मियों के आवास के लिए चिन्हित जमीन पर उनके ही कुछ रिश्तेदारों ने कब्जा कर रखा है। कब्जा हटाने की प्रक्रिया चल रही है। इसी जमीन पर जी+2 मॉडल का आवास परिसर बनाने की योजना है।

सिरसी में 18 मकानों का काम धीमा

सिरसी में 1.35 करोड़ रुपए की लागत से 18 मकान बनाने के दूसरे चरण की योजना वर्ष 2023 में शुरू हुई थी, लेकिन निर्माण कार्य अब तक धीमी गति से चल रहा है। सफाईकर्मियों का आरोप है कि सरकार सुविधाएं उपलब्ध करा रही है, लेकिन नगर प्रशासन की लापरवाही के कारण काम पूरा नहीं हो पा रहा है।

भटकल में 18 को घर, 9 इंतजार में

भटकल नगरपालिका के 27 स्थायी सफाईकर्मियों में से 18 को पहले चरण में मकान बनाकर सौंप दिए गए हैं। शेष 9 कर्मचारियों के लिए उचित जगह नहीं मिलने के कारण पुराने उपखंड अधिकारी कार्यालय के पीछे जमीन चिन्हित की गई है और अनुदान जारी होने का इंतजार है।

जाली नगर पंचायत के 7 सफाईकर्मियों के लिए कार्यालय के सामने गृहभाग्य आवास बनाया गया है। अंतिम चरण का काम बाकी होने से आवासों का हस्तांतरण नहीं हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, 10 और सफाईकर्मियों के लिए मकान बनाए जाने हैं।

यल्लापुर में 12 में से 9 मकान वितरित

यल्लापुर में सफाईकर्मियों के लिए 12 मकान बनाए गए हैं, जिनमें से 9 वितरित किए जा चुके हैं। तकनीकी कारणों से तीन मकानों का वितरण लंबित है।

सिद्धापुर में जमीन की कमी के कारण आवास निर्माण अटका है। पंचायत कार्यालय के पास की जमीन हस्तांतरित करने का अनुरोध किया गया है। तीन सफाईकर्मियों को आवास योजना के तहत घर दिए जा चुके हैं।

होन्नावर और मंकी में भी इंतजार

होन्नावर नगर पंचायत के 17 स्थायी सफाईकर्मियों में से अधिकांश को रॉयलकेरी के पास सरकार द्वारा निर्मित आवास मिले हैं। 13 और आवास बनाने की मंजूरी मिल चुकी है। दूसरी ओर, हाल में अस्तित्व में आई मंकी नगर पंचायत में अब तक सफाईकर्मियों को गृहभाग्य का लाभ नहीं मिला है। 10 कर्मचारियों के लिए 20 गुंटा जमीन मंजूर करने का प्रस्ताव राजस्व विभाग के पास है।

हल्याल में 28 को योजना का लाभ

हल्याल के 28 सफाईकर्मियों को गृहभाग्य योजना का लाभ मिला है। इनमें 10 ने अपने भूखंड पर मकान बनाए हैं, जबकि 18 को नगरपालिका की ओर से आश्रय योजना के तहत भूखंड दिए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी के लिए 7.50 लाख रुपए का अनुदान निर्धारित है। सात लाभार्थियों को राशि मिल चुकी है, जबकि 21 को अनुदान मिलना बाकी है।

अंकोला में सिर्फ पांच परिवारों के पास अपना घर

अंकोला नगरपालिका में 17 स्थायी सफाईकर्मी हैं, लेकिन केवल पांच परिवार अपने घर में रह रहे हैं। कुछ कर्मचारी नगरपालिका के आवासीय भवनों में रह रहे हैं। नगरपालिका अधिकारियों के अनुसार, केणी में आवास निर्माण का काम अंतिम चरण में है और जल्द ही अन्य सफाईकर्मियों को भी अपना घर उपलब्ध कराया जाएगा।

कुमटा में सफाईकर्मियों के 15 आवास भरे हुए हैं। चित्रिगी में बने 23 नए आवासों में 11 उपयोग में हैं, जबकि 12 खाली पड़े हैं।

दांडेेली में बने घरों में दूसरे लोग रह रहे!

दांडेेली में 72 सफाईकर्मियों में से 16 के लिए जी+2 मॉडल का आवास बनाया गया है। वर्ष 2022-23 में नियुक्त 18 कर्मचारियों के लिए जी+2 आवास निर्माण की टेंडर प्रक्रिया जारी है।

राज्य म्यूनिसिपल कर्मचारी संगठन के जिला समिति सदस्य डी. सैमसन ने कहा कि दांडेेली में जमीन की कमी नहीं है, इसलिए व्यक्तिगत आवास बनाए जाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले सफाईकर्मियों के लिए बनाए गए कुछ मकानों में दूसरे लोग रह रहे हैं और इसकी जांच होनी चाहिए।

मुंडगोड में मकानों की छतें टपक रहीं

मुंडगोड में सफाईकर्मियों के लिए वर्ष 2022 में मकान बनाए गए थे। कुछ ही वर्षों में इन मकानों की छतों से बारिश का पानी टपकने लगा है। यह आरोप भी है कि कुछ कर्मचारियों ने उन्हें आवंटित मकान दूसरों को किराए पर दे दिए और खुद पुराने मकानों में रह रहे हैं।

नगर पंचायत के मुख्याधिकारी संतोषकुमार एच. के अनुसार, 12 मकान बनाए जा चुके हैं और 10 कर्मचारियों के लिए मकान बनाना बाकी है। जमीन की समस्या के कारण दूसरे चरण का निर्माण प्रभावित हुआ है। मौजूदा भवन की छत से पानी रिस रहा है, जिसके लिए टिन की छत लगाने की जरूरत है।

जिलाधिकारी के. लक्ष्मीप्रिया ने अधिकारियों को गृहभाग्य योजना के तहत सफाईकर्मियों के लिए आवास निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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