लक्कुंडी के ऐतिहासिक स्मारकों पर गंदगी का ग्रहणलक्कुंडी के ऐतिहासिक स्मारकों पर गंदगी का ग्रहण

विश्व धरोहर जैसी विरासत के बीच फैली गंदगी, सीवर और कचरे से पर्यटक परेशान

ग्रामीणों ने स्थायी समाधान की मांग उठाई

मंदिर परिसरों के आसपास बदहाल सफाई व्यवस्था

गदग। प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए प्रसिद्ध लक्कुंडी गांव में स्वच्छता व्यवस्था बदहाल हो गई है। विश्वनाथ और नानेश्वर मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्मारकों के आसपास फैली गंदगी, खुले में शौच और जाम नालियों से न केवल स्थानीय लोगों बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय संग्रहालय से आगे बढ़ते ही कई स्थानों पर खुले में शौच के निशान दिखाई देते हैं। काशी विश्वनाथ और नानेश्वर मंदिर की चारदीवारी के पास कूड़े के ढेर, प्लास्टिक कचरा और गंदा पानी जमा रहता है। छोटी नालियां कचरे से अटी होने के कारण गंदा पानी सडक़ पर बहता रहता है। नानेश्वर मंदिर के सामने पेयजल पाइपलाइन में बार-बार होने वाले रिसाव से स्वच्छ और गंदा पानी मिलकर सडक़ पर फैल जाता है।

पर्यटकों पर पड़ रहा प्रतिकूल असर

ग्रामीणों का कहना है कि सडक़ पर बने गड्ढों में गंदा पानी भर जाने से स्थिति और खराब हो गई है। सडक़ पिछले तीन वर्षों से जर्जर है, लेकिन अब तक उसकी मरम्मत नहीं कराई गई। ऐसे में ऐतिहासिक स्मारकों का भ्रमण करने आने वाले पर्यटकों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

ग्राम पंचायत अधिकारी अमीर नायक ने बताया कि मंदिर परिसर के आसपास सप्ताह में दो बार सफाई कराई जाती है और लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है। स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए धार्मिक नेताओं की मदद लेने की भी योजना है।

स्थानीय निवासी राजासाब ने कहा कि गंदे पानी और कचरे की समस्या वर्षों पुरानी है। उन्होंने संबंधित विभागों से इस समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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