दस्तावेज जमा नहीं करने पर योजना से होंगे बाहर, फर्जी लाभार्थियों पर सरकार की सख्ती
हुब्बल्ली. कर्नाटक सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं में फर्जी लाभार्थियों पर शिकंजा कसते हुए 17 लाख से अधिक लाभार्थियों को नोटिस जारी किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित लोग इस माह के अंत तक आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं करते हैं तो उन्हें योजना से बाहर कर दिया जाएगा।
राज्य में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के 83 लाख लाभार्थी हैं। इनमें से 23 लाख मामलों को संदेह के आधार पर जांच के लिए चिन्हित किया गया था। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद चार लाख लाभार्थी पात्र पाए गए और उनकी पेंशन जारी रखी गई। शेष मामलों में व्यापक अनियमितताएं सामने आई हैं।
17 लाख लोगों से मांगे गए दस्तावेज
राजस्व विभाग (आपदा प्रबंधन एवं सामाजिक सुरक्षा) के सचिव मनोज कुमार मीणा ने बताया कि लगभग दो लाख लाभार्थी दिए गए पते पर नहीं मिले, जबकि 17 लाख लोगों को पहले एसएमएस और बाद में ग्राम प्रशासन अधिकारियों के माध्यम से नोटिस भेजकर आय प्रमाण-पत्र और आयु संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि नोटिस पाने वालों में करीब 99 प्रतिशत लोगों के अपात्र होने की आशंका है।
मार्च से रोकी गई पेंशन
जांच के दौरान वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, पूर्व देवदासी मासिक सहायता तथा मनस्विनी जैसी योजनाओं में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाभ लेने के मामले सामने आए हैं। इसी कारण नोटिस प्राप्त लाभार्थियों की मार्च से जून तक की पेंशन रोक दी गई है। यदि वे निर्धारित दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं तो उनकी पेंशन तत्काल बहाल कर दी जाएगी।
कैबिनेट करेगी अंतिम फैसला
सरकार के अनुसार समय-सीमा के भीतर दस्तावेज जमा करने वाले मामलों का निस्तारण तहसीलदार स्तर पर किया जाएगा। जबकि निर्धारित अवधि तक दस्तावेज नहीं देने वाले लाभार्थियों के नाम सूची से हटाने और उनकी पेंशन स्थायी रूप से बंद करने का निर्णय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जाएगा। इस पर निर्णय जुलाई के अंत अथवा अगस्त के पहले सप्ताह में होने की संभावना है।
सरकार ने बताया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं पर प्रतिवर्ष 11 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। केवल 32 हजार रुपए से कम वार्षिक आय वाले पात्र नागरिक ही इन योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। जांच में अधिक आय वाले, 60 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति, सरकारी कर्मचारी तथा आयकरदाता भी पेंशन प्राप्त करते पाए गए हैं।
सचिव मनोज कुमार मीणा ने बताया कि भविष्य में 60 वर्ष की आयु पूरी होते ही पेंशन स्वत: स्वीकृत होने और लाभार्थी की मृत्यु के बाद पेंशन स्वत: बंद होने की व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पात्रों तक ही पहुंचे।
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