हल्याल (उत्तर कन्नड़)। पश्चिमी घाट के पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र के रूप में जोयडा और आसपास के क्षेत्रों को शामिल कर केंद्र द्वारा जारी सातवें मसौदा अधिसूचना का राज्य प्रशासनिक सुधार आयोग के अध्यक्ष एवं विधायक आर.वी. देशपांडे ने कड़ा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में केंद्रीय मंत्रालय को आपत्ति दर्ज कराई गई है।
शहर में पत्रकारों से बातचीत में देशपांडे ने कहा कि इससे पहले भी केंद्र सरकार को आपत्ति भेजी गई थी। अब सातवीं बार मसौदा अधिसूचना जारी कर आपत्तियां एवं सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। जब ईश्वर खंड्रे वन मंत्री थे, तब कस्तूरीरंगन रिपोर्ट के क्रियान्वयन को लेकर चर्चा हुई थी और केंद्र सरकार को रिपोर्ट को खारिज करने की सलाह दी गई थी।
देशपांडे ने कहा कि केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को ज्ञापन तथा संबंधित मंत्रालय को इ-मेल के माध्यम से आपत्ति भेजी गई है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी, शोभा करंदलाजे, प्रल्हाद जोशी, वी. सोमन्ना तथा सांसद विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी को भी ज्ञापन सौंपा गया है।
उन्होंने उत्तर कन्नड़ जिले को कर्नाटक उच्च न्यायालय की मेंगलूरु पीठ के अधिकार क्षेत्र में शामिल करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार की मांग की। इस संबंध में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को लिखित ज्ञापन सौंपे जाने की जानकारी दी।
देशपांडे ने कहा कि किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा दिलाने के लिए संबंधित कृषि अधिकारियों को नुकसान की रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
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