भाजपा अपने शासनकाल का इतिहास देखे, नागेंद्र के मुद्दे पर प्रदर्शन से पहले आत्ममंथन करे
दांडेेली (उत्तर कन्नड़)। जिला प्रभारी मंत्री लक्ष्मण सवदी ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा नेताओं को भ्रष्टाचार के बारे में बोलने का नैतिक अधिकार है क्या?
शहर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जब उनसे पूर्व मंत्री नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर भाजपा के विरोध प्रदर्शन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने यह पलटवार किया।
सवदी ने कहा कि भाजपा को अपने शासनकाल के दौरान हुए मामलों का इतिहास नहीं भूलना चाहिए। एक बेटे के भ्रष्टाचार के कारण एक मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। हालांकि उन्होंने मुख्यमंत्री या बेटे का नाम लेने से इनकार करते हुए कहा कि “मेरे मुंह से उनका नाम बुलवाने की कोशिश मत कीजिए।”
उन्होंने कहा कि अतीत में भाजपा के किन मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को किन परिस्थितियों में इस्तीफा देना पड़ा, यह राज्य की जनता अच्छी तरह जानती है। पूर्व मंत्री नागेंद्र के मामले में प्रदर्शन कर रहे भाजपा नेताओं को पहले आत्ममंथन करना चाहिए। दिखावे और दोहरे मापदंड वाली राजनीति से भाजपा नेता अपना राजनीतिक ग्राफ खुद ही नीचे गिरा रहे हैं।
राजनीतिक नैतिकता खो रही भाजपा
सवदी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता धीरे-धीरे राजनीतिक नैतिकता खो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने शासनकाल का मूल्यांकन करना चाहिए।
खाली महिला मंत्री पद बेलगावी को देने की मांग
मंत्री पद के सवाल पर सवदी ने कहा कि बेलगावी 18 विधानसभा क्षेत्रों वाला बड़ा जिला है। इससे पहले जिले को पांच मंत्री पद दिए जाने के उदाहरण हैं। अब मंत्रिमंडल में खाली महिला मंत्री पद बेलगावी जिले को देने की मांग है।
उन्होंने कहा कि लक्ष्मी हेब्बालकर को फिर मंत्री बनाए जाने पर उन्हें सबसे ज्यादा खुशी होगी। हर विधायक की मंत्री बनने की इच्छा होती है, लेकिन मुख्यमंत्री और आलाकमान जो निर्णय लेंगे, सभी उसका पालन करेंगे।
गारंटी योजनाओं से आर्थिक दिवालियापन की भाजपा की बात गलत
सवदी ने कहा कि भाजपा ने दावा किया था कि राज्य सरकार की पांच गारंटी योजनाओं के कारण कर्नाटक आर्थिक रूप से दिवालिया हो जाएगा। लेकिन भाजपा का यह दावा गलत साबित हुआ है।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में इन योजनाओं पर सालाना करीब 50 से 55 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं और राज्य के इस मॉडल को देश के अन्य राज्य भी अपनाने लगे हैं।
इस दौरान विधायक सतीश सैल, एमएलसी गणपति उल्वेकर, जिलाधिकारी और जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।
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