कर्नाटक उच्च न्यायालय की कलबुर्गी पीठ का निर्देश
तीन माह के भीतर नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने को कहा
कलबुर्गी। कर्नाटक उच्च न्यायालय की कलबुर्गी खंडपीठ ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआइसी) की कलबुर्गी शाखा में वर्षों से संविदा आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। पीठ ने निर्देश दिया है कि स्थायी प्रकृति के पदों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्त किए गए कर्मचारियों को लगातार संविदा पर रखने के बजाय उनकी सेवाएं नियमित की जाएं।
श्रीधर गौड़ा, ज्योति, विनोद, उमेश, चिदानंद, विजयानंद और मडिवाळप्पा ने याचिका दायर कर बताया था कि वे वर्ष 1999 से 2024 के बीच संविदा कर्मचारी के रूप में कार्यरत हैं। उनके पद स्थायी प्रकृति के थे और आवेदन आमंत्रित करने तथा साक्षात्कार सहित निर्धारित प्रक्रिया के बाद नियुक्ति की गई थी। इसके बावजूद उन्हें संविदा कर्मचारी के रूप में ही जारी रखा गया।
इससे पहले नवंबर 2024 में एकल पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के रणबीर सिंह बनाम एस.के. राय मामले का हवाला देते हुए कर्मचारियों को प्रत्येक वर्ष की सेवा के लिए एक लाख रुपए के हिसाब से मुआवजा देने का आदेश दिया था। नियमितीकरण की मांग करने वाले कर्मचारियों और मुआवजा देने से असहमत एलआइसी ने इस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पी. विलास कुमार और नितेश पाडियाल ने दलील दी कि कर्मचारियों की नियुक्ति एलआइसी द्वारा 1993 में बनाए गए अस्थायी कर्मचारी भर्ती नियमों के तहत रिक्त पदों पर हुई थी और कई कर्मचारी दशकों से सेवा दे रहे हैं।
न्यायाधीश आर. नटराज और प्रदीप सिंह येरूर की खंडपीठ ने कहा कि एलआइसी ने स्थायी प्रकृति के पदों के लिए निर्धारित नियुक्ति प्रक्रिया के अनुरूप इन कर्मचारियों की नियुक्ति की है। इसलिए उन्हें अनिश्चितकाल तक संविदा पर नहीं रखा जा सकता।
पीठ ने फैसला सुनाए जाने की तारीख से तीन माह के भीतर संबंधित कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने का आदेश दिया है।
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