वचनानंद स्वामी का पोक्सो मामला
शिकायत दर्ज होने से पहले अग्रिम जमानत दिए जाने को बताया ‘चौंकाने वाला’
स्वामी को जारी किया नोटिस
दावणगेरे. हरिहर स्थित पंचमसाली गुरुपीठ के वचनानंद स्वामी के खिलाफ दर्ज पोक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज) मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने दावणगेरे जिला न्यायालय द्वारा दी गई अग्रिम जमानत पर गंभीर आपत्ति जताई है। उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया इस प्रक्रिया को असामान्य और चिंताजनक बताते हुए स्वामी को नोटिस जारी किया है।
शिकायत से पहले जमानत पर हाईकोर्ट ने जताई हैरानी
मठ के बालकों के साथ कथित दुव्र्यवहार और बच्चों के शोषण के आरोपों को लेकर वचनानंद स्वामी के खिलाफ पोक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी की आशंका के बीच दावणगेरे जिला अदालत ने 21 अप्रेल को उन्हें सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान की थी।
इस आदेश को चुनौती देते हुए पीडि़त बालक की मां ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश एम. नागप्रसन्न की पीठ ने कहा कि शिकायत दर्ज होने से पहले ही अग्रिम जमानत दिए जाने का तरीका प्रथम दृष्टया उचित नहीं प्रतीत होता और यह आश्चर्यजनक है।
23 जून को होगी अगली सुनवाई
उच्च न्यायालय ने वचनानंद स्वामी को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 23 जून के लिए निर्धारित की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत जिला न्यायालय द्वारा दी गई अग्रिम जमानत को बरकरार रखती है या उसे निरस्त करती है।
मठ के बच्चों ने लगाए थे प्रताडऩा के आरोप
मठ में रहने वाले बच्चों ने स्वामी पर अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने और मानसिक तथा शारीरिक प्रताडऩा देने के आरोप लगाए थे। शिकायत मिलने के बाद बाल कल्याण समिति के अधिकारियों ने जांच शुरू की थी। इस मामले में स्वामी का चिकित्सकीय परीक्षण भी कराया जा चुका है।
ट्रस्टियों ने भी पद से हटाया था
इससे पहले दो पीठों के प्रबंधन को लेकर उत्पन्न विवाद के बीच अप्रेल के प्रारंभ में हुई बैठक में मठ के 15 ट्रस्टियों में से 13 ने सर्वसम्मति से वचनानंद स्वामी को मठ प्रमुख पद से हटाने का निर्णय लिया था।
न्यायालय की टिप्पणी
न्यायाधीश एम. नागप्रसन्न की पीठ ने कहा कि शिकायत दर्ज होने से पहले अग्रिम जमानत दिए जाने की प्रक्रिया प्रथम दृष्टया सही नहीं लगती और यह चौंकाने वाली है।
मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि उससे इस बहुचर्चित प्रकरण की दिशा तय हो सकती है।
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