झरनों ने खोई चमक
कम बारिश के कारण पर्यटकों की संख्या घटी
अच्छी बारिश का इंतजार
बेल्तंगडी (दक्षिण कन्नड़). पश्चिमी घाट की मनमोहक वादियों के बीच स्थित चार्माडी घाट हर वर्ष मानसून के दौरान अपनी प्राकृतिक सुंदरता से पर्यटकों को आकर्षित करता है। लेकिन इस बार अपेक्षित बारिश नहीं होने से घाट के झरने सूने नजर आ रहे हैं और पर्यटन गतिविधियों पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।
झरनों में नहीं दिख रही मानसून की रौनक
आमतौर पर जून महीने में होने वाली तेज बारिश के बाद चार्माडी घाट सडक़ के दोनों ओर छोटे-बड़े झरने बहने लगते हैं। घने कोहरे, हरी-भरी पहाडिय़ों और चट्टानों से गिरती जलधाराओं का मनमोहक दृश्य प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर खींचता है। हालांकि इस वर्ष अधिकांश झरनों में बहुत कम पानी है, जबकि कुछ पूरी तरह सूख गए हैं। इसके कारण प्राकृतिक सौंदर्य देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।
नदियों और प्रमुख झरनों पर भी असर
घाट क्षेत्र से निकलने वाली नदियों में भी जलस्तर सामान्य से काफी कम है। तालुक के प्रसिद्ध कडमगुंडी, बोल्ले और एरमाई सहित अन्य प्रमुख झरने भी बारिश की कमी के कारण अपना आकर्षण खो चुके हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने पर ये झरने फिर से पूरे वेग के साथ बहने लगेंगे।
सेल्फी और रील्स का उत्साह भी गायब
हर वर्ष जून में चार्माडी घाट पर बड़ी संख्या में पर्यटक झरनों के सामने सेल्फी लेते और रील्स बनाते नजर आते थे। कई बार भारी भीड़ के कारण सडक़ पर यातायात भी प्रभावित हो जाता था। लेकिन इस बार ऐसी कोई स्थिति देखने को नहीं मिल रही है। केवल कुछ राहगीर थोड़ी देर रुककर प्राकृतिक दृश्य देखकर आगे बढ़ जाते हैं।
पर्यटक किरण दोंडोले ने कहा कि हर मानसून में चार्माडी घाट की यात्रा यादगार रहती थी, लेकिन इस वर्ष कम बारिश के कारण झरनों की सुंदरता फीकी पड़ गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होगी और चार्माडी घाट एक बार फिर अपनी प्राकृतिक छटा से पर्यटकों का स्वागत करेगा।
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